रायपुर , दिसंबर 11 -- छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने नक्सल मामलों में सरकार की नीति पर गंभीर प्रश्न खड़े करते हुए कहा कि राज्य मंत्रिमंडल द्वारा समर्पित नक्सलियों के आपराधिक प्रकरणों को वापस लेने की समीक्षा का निर्णय अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।
उन्होंने पत्रकारों से कहा कि सरकार यह स्पष्ट करे कि क्या झीरम कांड, ताड़मेटला, रानीबोदली, एडसमेटा जैसे जघन्य नरसंहारों में शामिल नक्सलियों के मामले भी वापस लिए जाएंगे। बैज ने कहा कि ऐसे गंभीर प्रकरणों में शामिल नक्सलियों और उ न निर्दोष आदिवासियों के मामलों को एक समान नहीं माना जा सकता, जिन्हें बिना पर्याप्त सबूत सिर्फ नक्सली या नक्सल समर्थक बताकर वर्षों से जेलों में बंद रखा गया है।
प्रदेश कांग्रेस कार्यालय के द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में आदिवासियों को पूर्ववर्ती सरकारों ने केवल टारगेट पूरा करने के लिए गिरफ्तार किया था, जिनके खिलाफ आज तक चार्जशीट तक प्रस्तुत नहीं की जा सकी है। उन्होंने कहा कि जिन पर कोई हत्या, हमला या अन्य गंभीर अपराध का आरोप प्रमाणित नहीं हुआ है, उन निर्दोष कैदियों के मामले पर सरकार क्यों मौन है? बैज ने कहा कि यदि सरकार असल नक्सलियों को पुनर्वास योजनाओं के तहत मुख्यधारा में लाने की बात कर रही है, तो पहले उन निर्दोष आदिवासियों के प्रति संवेदनशील होना आवश्यक है, जिनका जीवन वर्षों से जेल की सलाखों के पीछे अन्यायपूर्ण तरीके से बीत रहा है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को स्पष्ट नीति बनाते हुए उन सभी मामलों की त्वरित समीक्षा करनी चाहिए, जिनमें सबूतों के अभाव में आदिवासी बंदियों का भविष्य अंधकार में धकेला गया है। बैज ने मांग की कि ऐसे निर्दोष लोगों को तुरंत रिहा कर उनके खिलाफ दर्ज मामले वापस लिए जाएं, ताकि वे अपने परिवार और समाज के साथ सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें।
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