चेन्नई , फरवरी 03 -- समय पर जांच और उन्नत चिकित्सा तकनीक के चलते एशियन इंस्टीट्यूट ऑफ नेफ्रोलॉजी एंड यूरोलॉजी (एआईएनयू), चेन्नई में दो महिलाओं के किडनी ट्यूमर का समय रहते पता चलने के बाद सफल इलाज किया गया, जिससे उन्हें नयी ज़िंदगी मिली है।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक इनमें एक 23 वर्षीय युवती कराईकुडी से और दूसरी 38 वर्षीय दो बच्चों की मां तिरुवन्नामलाई से हैं। कराईकुडी की 23 वर्षीय युवती थेनमोझी (बदला हुआ नाम), जो अपने आश्रित माता-पिता के साथ रहती हैं, को पीठ में लगातार हल्का दर्द बना हुआ था, जो ठीक नहीं हो रहा था। स्थानीय डॉक्टर की सलाह पर वह जांच के लिए एआईएनयू, चेन्नई पहुंचीं।
जांच में इतनी कम उम्र में दुर्लभ रूप से पाया जाने वाला स्थानीयकृत किडनी ट्यूमर का पता चला। पूर्व में कोई गंभीर बीमारी या स्पष्ट लक्षण न होने के बावजूद, समय पर कराई गई इमेजिंग जांच से ट्यूमर की पहचान हो गई। इसके बाद डॉक्टरों ने रोबोटिक-असिस्टेड पार्टियल नेफ्रेक्टॉमी के जरिए ट्यूमर को हटाया और किडनी को सुरक्षित रखा। फिलहाल वह स्वस्थ होकर ठीक हो रही हैं और उनका परिवार समय पर हुई कार्रवाई से राहत महसूस कर रहा है।
दूसरे मामले में, तिरुवन्नामलाई की 38 वर्षीय गृहिणी तमिल सेल्वी (बदला हुआ नाम) को कोई खास चिंताजनक लक्षण नहीं थे। किसी अन्य दर्द की जांच के दौरान कराए गए स्कैन में संयोगवश किडनी ट्यूमर का पता चला, जिसके बाद उन्हें एआईएनयू रेफर किया गया। डॉक्टरों के अनुसार, किडनी ट्यूमर को अक्सर "साइलेंट कैंसर" कहा जाता है, क्योंकि इसके लक्षण देर से सामने आते हैं। तमिल सेल्वी के मामले में ट्यूमर प्रमुख रक्त वाहिकाओं के पास था, जिससे सर्जरी जटिल थी, लेकिन रोबोटिक तकनीक की मदद से बिना रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाए ट्यूमर को सफलतापूर्वक निकाल लिया गया और किडनी की कार्यक्षमता सुरक्षित रखी गई।
दोनों ही मामलों में किडनी-संरक्षण वाली उन्नत रोबोटिक सर्जरी की गई, जिसे अब प्रारंभिक चरण के ट्यूमर के लिए सर्वोत्तम विकल्प माना जा रहा है।
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