कोलकाता , मार्च 28 -- शनिवार को जब पूरी दुनिया 'अर्थ आवर' मना रही है, विधानसभा चुनाव की ओर बढ़ रहे पश्चिम बंगाल में विभिन्न राजनीतिक विचारधाराओं के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने एक मंच पर आकर जलवायु संकट, प्रकृति के नुकसान और स्थिरता की आवश्यकता पर बल दिया।

वक्ताओं ने उत्तर में हिमालय से लेकर दक्षिण में बंगाल की खाड़ी तक फैली पश्चिम बंगाल की भौगोलिक विविधता पर जोर दिया और कहा कि राज्य जलवायु परिवर्तन की अनिश्चितताओं के प्रति अत्यंत संवेदनशील है। प्रदूषण, विशेष रूप से वायु, नदी, भूजल, शोर प्रदूषण के साथ अपशिष्ट प्रबंधन आदि के अन्य रूप भी अब संकटपूर्ण स्तर पर हैं।

प्रेस क्लब कोलकाता में 'पॉलिटिक्स मीट्स परिवेश' शीर्षक वाली इस बैठक का आयोजन 'द प्लुरल्स' ने किया था। यह पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से पहले होने वाली चर्चाओं का हिस्सा था।

रिपोर्टों के अनुसार, प्रदूषण के प्रत्यक्ष प्रभाव के रूप में भारत के अन्य हिस्सों के साथ-साथ इस राज्य में भी शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के लोगों का औसत जीवनकाल काफी कम हो गया है। इसके परिणामस्वरूप सार्वजनिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। वास्तव में, नवीनतम 'लैंसेट' रिपोर्ट ने जलवायु परिवर्तन और वायु प्रदूषण को दुनिया भर में स्वास्थ्य के लिए शीर्ष खतरों के रूप में पहचाना है। वैश्विक मानकों की तुलना में पश्चिम बंगाल सहित भारत को इसका अधिक खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।

पर्यावरण कार्यकर्ता सुभाष दत्ता ने कहा कि बार-बार चिंता जताये जाने के बावजूद पर्यावरण के उल्लंघन की अनदेखी जारी है। उन्होंने कहा, " जब अदालतें अपशिष्ट प्रबंधन और प्रदूषण नियंत्रण पर निर्देश जारी करती हैं, तब भी उनका कार्यान्वयन धीमा रहता है। पर्यावरण को होने वाले नुकसान को अभी उस गंभीरता से नहीं लिया जाता है, जिसका वह हकदार है। "उन्होंने आने वाली सरकार से बुनियादी पर्यावरणीय प्राथमिकताओं पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, " जो कोई भी सत्ता में आता है, उसे वायु, जल और ध्वनि प्रदूषण के साथ-साथ भूजल संदूषण को भी ध्यान में रखना चाहिए और रखना ही होगा, क्योंकि ये सीधे तौर पर सार्वजनिक स्वास्थ्य को प्रभावित करतेहैं। "सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के नेता देबाशीष कुमार ने कहा कि राज्य सरकार ने पर्यावरण नीतियों को सार्वजनिक स्वास्थ्य की पहल से जोड़ा है। उन्होंने कहा, " पर्यावरण के कई मुद्दे बार-बार उठाये गये हैं, लेकिन उन्हें अब भी गंभीर अपराध के रूप में नहीं देखा जाता है। पर्यावरण और स्वास्थ्य आपस में गहराई से जुड़े हुये हैं। "उन्होंने स्वच्छ ऊर्जा और टिकाऊ परिवहन को बढ़ावा देने के लिए उठाये गये कदमों का भी उल्लेख किया। श्री कुमार ने कहा, " हम जीवाश्म ईंधन की खपत को कम करने के लिए इलेक्ट्रिक बसों को बढ़ावा दे रहे हैं, सौर ऊर्जा परियोजनाओं का विस्तार कर रहे हैं और ड्रेनेज इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत कर रहे हैं।"उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि जनसंख्या के दबाव और अतिक्रमण के कारण नहरों और आर्द्रभूमि का जीर्णोद्धार करना कठिन हो गया है।

माकपा के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने प्राकृतिक संसाधनों के अवैध निष्कर्षण और भूमि अतिक्रमण की आलोचना की। उन्होंने कहा, " अवैध बालू खनन, लैंड फिलिंग और पत्थर का निष्कर्षण नदियों और आर्द्रभूमि को नुकसान पहुंचा रहे हैं। जब ऐसी गतिविधियां जारी रहती हैं तो पर्यावरण कानून अपनी प्रभावशीलता खो देते हैं।"सलीम ने इस बात पर जोर दिया कि पर्यावरण को होने वाले नुकसान के प्रत्यक्ष आर्थिक परिणाम होते हैं, जो मछुआरों और किसानों को समान रूप से प्रभावित करते हैं। उन्होंने उत्सर्जन कम करने के लिए मजबूत सार्वजनिक परिवहन प्रणाली और साइकिल चलाने को व्यापक रूप से अपनाने का आह्वान किया।

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