जयपुर , अक्टूबर 31 -- सेना के सप्त शक्ति कमान के अधीन ज्ञान शक्ति थिंक टैंक (जीएसटीटी) ने जयपुर छावनी में "चीन की चुनौती " विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया।
रक्षा सू्त्रों ने शुक्रवार को बताया कि कार्यक्रम में सप्त शक्ति कमान के आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल मनजिंदर सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस सेमिनार में लेफ्टिनेंट जनरल एस.एल. नारसिम्हन (सेवानिवृत्त), राजदूत गौतम बंबावाले, राजदूत सतीश मेहता और जिंदल विश्वविद्यालय की अंतरराष्ट्रीय संबंध विशेषज्ञ प्रोफेसर एलिज़ाबेथ रोच सहित प्रतिष्ठित वक्ताओं ने भाग लिया और विषय के विभिन्न आयामों पर विश्लेषणात्मक विचार प्रस्तुत किए।
संगोष्ठी में चीन की तीव्र आर्थिक प्रगति, बढ़ती सैन्य क्षमता, विकसित होती तकनीकी श्रेष्ठता और नागरिक एवं रक्षा क्षेत्रों में उसकी बढ़ती विनिर्माण क्षमता के परिप्रेक्ष्य में भारत-चीन संबंधों की गहन समीक्षा की गयी। वक्ताओं ने कहा कि शक्ति संतुलन को चीन अपनी तरफ झुकाना चाहता है। वक्ताओं ने भारत के पड़ोस और विस्तृत भू-राजनीतिक क्षेत्र में चीन की बढ़ती उपस्थिति, महत्वपूर्ण खनिजों के लिए भारत की निर्भरता और वर्तमान वैश्विक अनिश्चितताओं पर प्रकाश डाला।
रक्षा सू्त्रों ने बताया कि सप्त शक्ति कमान द्वारा नवम्बर 2024 में स्थापित ज्ञान शक्ति थिंक टैंक एक उत्कृष्ट पहल है, जिसका उद्देश्य ज्ञान, विशेषज्ञता एवं अत्याधुनिक तकनीकी प्रगति का समन्वय सुनिश्चित करना है। इसके सदस्यों में अनुभवी वेटरन्स, उद्योग जगत के वरिष्ठ नेतृत्व, अकादमिक विशेषज्ञ और देश के प्रमुख तकनीकी संस्थानों के प्रतिनिधि सम्मिलित हैं।
जीएसटीटी द्वारा अपनी स्थापना से लेकर अब तक कई महत्त्वपूर्ण सेमिनार, प्रदर्शनी एवं संगोष्ठियों का आयोजन किया गया है, जिनमें "रक्षा विनिर्माण में आत्मनिर्भरता: राजस्थान में अवसर", "इंडिया'ज जर्नी: चार्टिंग द पाथ टू विकसित भारत", "राष्ट्र निर्माण में वेटरन्स का योगदान", भारत के पड़ोस में बदलते भू-रणनीतिक परिदृश्य और समकालीन आर्थिक एवं औद्योगिक विषयों पर आधारित सत्र शामिल हैं।
इस थिंक टैंक ने सैन्य-नागरिक समन्वय को सुदृढ़ करने, नवाचार को प्रोत्साहित करने, तकनीकी आत्मसात एवं रक्षा विनिर्माण को बढ़ावा देने और 'विकसित भारत' के राष्ट्रीय लक्ष्य के समर्थन में उल्लेखनीय भूमिका निभाई है।
संगोष्ठी के अंत में आर्मी कमांडर ने क्षेत्र में हो रहे भू-राजनीतिक एवं आर्थिक परिवर्तनों से अद्यतन रहने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि पूर्व में चीन, पाकिस्तान, कुवैत, नेपाल एवं भूटान में भारत के राजदूत रहे वरिष्ठ अधिकारियों, चीन में भारत के पूर्व डिफेंस प्रतिनिधि और प्रतिष्ठित शिक्षा विशेषज्ञों जैसे विशिष्ट पैनल के साथ संवाद से संगठन के युवा नेताओं की अंतरराष्ट्रीय विषयों पर समझ और अधिक समृद्ध होगी। उन्होंने सभी वक्ताओं का उनके समय एवं मूल्यवान विचारों के लिए आभार व्यक्त किया।
यह संगोष्ठी राष्ट्रीय विकास, सुरक्षा एवं क्षमता निर्माण को सुदृढ़ करने की दिशा में एक और महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है और भारत को वैश्विक मंच पर उसके समुचित स्थान तक पहुँचाने की और गति प्रदान करता है।
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