जयपुर , दिसम्बर 07 -- राजस्थान में सप्त शक्ति कमांड द्वारा रविवार को जयपुर में आयोजित 'ऑनर रन' में सैन्यकर्मियों और आमजन ने उत्साहपूर्वक शिरकत की।
रक्षा सूत्रों ने बताया कि यह आयोजन साहस, दृढ़ता और राष्ट्रीय गौरव का उत्सव रहा, जिसमें सैन्य कर्मियों और विभिन्न क्षेत्रों से आए नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
सूत्रों ने बताया कि दौड़ की शुरुआत ऐतिहासिक अल्बर्ट हॉल संग्रहालय से हुई और जेएलएन मार्ग की ऊर्जा से भरपूर एक सुहानी सर्द सुबह में आगे बढ़ी। 'ऑनर रन' ने पूर्व और सेवारत सैनिकों, एनसीसी कैडेट्स, प्रशिक्षत धावकों, पैरा-एथलीट्स, परिवारों एवं स्थानीय नागरिकों को एक मंच पर लाया, जिनके उत्साह और जज़्बे ने सभी को प्रेरित किया।
रक्षा सूत्रों ने बताया कि विभिन्न श्रेणियों -10 किलोमीटर और पांच किलामीटर-की दौड़ों को मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने झंडी दिखाकर रवाना किया, वहीं 21 किमी दौड़ को लेफ्टिनेंट जनरल मनजिंदर सिंह आर्मी कमांडर, सप्त शक्ति कमांड, ने वरिष्ठ गणमान्यों की उपस्थिति में झंडी दिखाई। उनकी उपस्थिति ने प्रतिभागियों में अपार उत्साह का संचार किया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि ऑनर रन केवल एक दौड़ नहीं, बल्कि हमारी देशभक्ति का प्रतीक है और उन वीर सैनिकों के साहस, शौर्य एवं बलिदान को नमन करने का श्रेष्ठ अवसर है जिन्होंने कश्मीर से कन्याकुमारी तक राष्ट्र की रक्षा में योगदान दिया है। लेफ्टिनेंट जनरल सिंह आर्मी कमांडर सिंह ने प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि आज उठाया गया उनका प्रत्येक कदम, उन वीर सैनिकों के लिए सम्मान का प्रतीक है जिन्होंने राष्ट्र की रक्षा में अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया।
रक्षा सूत्रों ने बताया कि इस भव्य आयोजन में 21 किलोमीटर, 10 किलोमीटर और पांच किलोमीटर की समयबद्ध दौड़ आयोजित की गईं, जिनके लिए कुल 22 लाख सात हजार रुपये की पुरस्कार राशि निर्धारित थी। इससे फिटनेस, सार्वजनिक सहभागिता और उत्कृष्ट प्रदर्शन काे बढ़ावा मिला। इससे पूरे शहर में उत्साह का माहौल बना।
रक्षा सूत्रों ने बताया कि कार्यक्रम का समापन उत्साहपूर्ण समारोहों के साथ हुआ, जो जयपुर के नागरिकों की सशस्त्र बलों के प्रति एकता, गर्व और सम्मान की भावना को अभिव्यक्त कर रहा था। जयपुर में आयोजित होने जा रही आगामी आर्मी डे परेड 2026 की भूमिका के रूप में आयोजित 'ऑनर रन' ने न केवल सैनिकों और पूर्व सैनिकों के बलिदान का स्मरण कराया, बल्कि नागरिकों को साहस, अनुशासन, सेवा और दृढ़ता के मूल्यों को अपनाने के लिये प्रेरित भी किया।
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