भोपाल , फरवरी 1 -- मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भारतीय संस्कृति में परंपरा और विज्ञान कभी अलग-अलग नहीं रहे। सनातन व्यवस्था के संस्कार केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित, स्वस्थ और मूल्यवान बनाने की वैज्ञानिक पद्धति हैं। गर्भ में पल रहे शिशु को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से संस्कारित करना ही गर्भ संस्कार है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में बनने वाले शासकीय चिकित्सालयों के भवनों में गर्भ संस्कार कक्ष बनाए जाएंगे। साथ ही प्रदेश के चिकित्सा विश्वविद्यालयों एवं उनसे संबद्ध महाविद्यालयों में गर्भ संस्कार के अध्ययन-अध्यापन की व्यवस्था की जाएगी। इससे संबंधित गजट नोटिफिकेशन शीघ्र जारी किया जाएगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को इंदौर के डेली कॉलेज में आयोजित गर्भ संस्कार पुस्तक विमोचन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कर एवं भारत माता के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री का अंगवस्त्र एवं श्रीफल भेंट कर अभिनंदन किया गया। इस अवसर पर उन्होंने पुस्तक 'गर्भ संस्कार' का विमोचन किया, जिसके लेखक डॉ. अनिल गर्ग और डॉ. सीमा गर्ग हैं। मुख्यमंत्री ने उपस्थित जनसमुदाय को गर्भ संस्कार के प्रचार-प्रसार हेतु सकारात्मक प्रयास करने का संकल्प भी दिलाया। उन्होंने पद्मश्री डॉ. नारायण व्यास का सम्मान भी किया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मातृत्व केवल जैविक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि गर्भ शरीर निर्माण के साथ संस्कार की पहली पाठशाला भी है। आधुनिक विज्ञान ने सिद्ध किया है कि गर्भावस्था के 5-6 महीने से ही बच्चे पर मां की भावनाओं और बाह्य वातावरण का प्रभाव पड़ने लगता है। उन्होंने महाभारत में अभिमन्यु सहित अन्य पौराणिक उदाहरणों का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारे पूर्वज मानसिक और भावनात्मक विकास की गहरी समझ रखते थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि आयुर्वेद की सामर्थ्य सर्वविदित है और कोविड काल में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों ने आयुर्वेद की प्रक्रियाएं अपनाईं। आयुर्वेद में गर्भ संस्कार के महत्व को स्वीकार किया गया है और अब आधुनिक चिकित्सा विज्ञान भी इसके महत्व को मान्यता दे रहा है।

अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य भय्याजी जोशी ने कहा कि भारत का चिंतन विश्व पर शासन करने का नहीं, बल्कि मार्गदर्शन करने का है। भारत एक ऐसा सुपर राष्ट्र बनेगा, जो जीवन के विविध क्षेत्रों में दुनिया को सही दिशा दिखाएगा। उन्होंने कहा कि श्रेष्ठ मनुष्य का निर्माण केवल शिक्षा या भौतिक संपदा से नहीं, बल्कि सुशिक्षा और सुसंस्कार से संभव है। मानव संपदा के बिना राष्ट्र का उत्थान नहीं हो सकता। उन्होंने पश्चिमी और भारतीय दृष्टिकोण की तुलना करते हुए कहा कि भारतीय चिंतन पूर्ण विकसित मनुष्य के निर्माण पर केंद्रित है, जहां शक्ति के साथ संस्कार अनिवार्य माने गए हैं।

कार्यक्रम को डॉ. अनिल कुमार गर्ग और डॉ. हितेश भाई जानी ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, विधायक महेन्द्र हार्डिया और गोलू शुक्ला, आरोग्य भारती के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि तथा आध्यात्मिक, धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

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