बेंगलुरु , मार्च 17 -- कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने विधायकों के सवालों का जवाब देने में देरी को लेकर अपने मंत्रियों को पत्र लिखकर कड़ी फटकार लगाई है।

श्री सिद्दारमैया ने लिखा है "इससे न केवल सरकार को काफी शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा है, बल्कि विधायकों के अधिकारों और सदन की गरिमा को भी ठेस पहुंची है।" उन्होंने विभागीय सचिवों को देरी का तुरंत स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया और कहा कि लंबित सवालों को स्पष्ट समय सीमा के भीतर संबोधित किया जाए।

यह पत्र विधानसभा में बढ़ते तनाव के बीच आया है, जब विधानसभा अध्यक्ष यू. टी. खादर ने कार्यवाही स्थगित कर दी थी और उचित जवाब नहीं दिये जाने के विरोध में बाहर चले गए थे। उल्लेखनीय है कि 230 से अधिक सवालों में से केवल 84 के जवाब दिए गए थे, जिससे श्री खादर को चेतावनी देनी पड़ी कि उचित जवाब के बिना सदन की कार्यवाही नहीं चलेगी।

वर्तमान सत्र में वित्त विभाग ने 30 में से छह सवालों के जवाब दिए हैं और समाज कल्याण विभाग ने नौ में से एक जबकि सहकारिता विभाग ने 12 में से एक भी प्रश्न का जवाब नहीं दिया। इसी तरह जल संसाधन विभाग ने 11 में से 4, नगर विकास ने 24 में से 7, लघु सिंचाई ने 19 में से 13 और केवल सूचना प्रौद्योगिकी विभाग ने अपने दोनों प्रश्नों के उत्तर दिये हैं।

श्री खादर ने उल्लेख किया कि पिछले पांच दिनों में जवाब देने की दर 10 से 30 प्रतिशत के बीच रही। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रत्येक विधायक का प्रश्न सार्वजनिक चिंताओं को दर्शाता है और इसे पूरी तरह से संबोधित किया जाना चाहिए।

इस बीच राजस्व, अल्पसंख्यक कल्याण और लोक निर्माण विभाग के तीन अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है, जिससे यह पुख्ता हुआ है कि विधायी जवाबदेही में चूक बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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