नयी दिल्ली , दिसंबर 08 -- लोकसभा में सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के सदस्यों ने वंदे मातरम् की भूमिका को ऐतिहासिक बताते हुए कहा है कि इस गीत ने आजादी के आंदोलन में पूरे देश को एक सूत्र में बांधे रखा और भाषाई तथा भौगोलिक विविधता में एकजुटता का ऐसा संचार किया जिसने पूरे देश में आजादी के दीवानों को अंग्रेज सत्ता के खिलाफ मिलकर लड़ने की अदम्य शक्ति प्रदान की।
राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने पर लोकसभा में सोमवार को हुई चर्चा में हिस्सा लेते हुए सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के सदस्यों ने भले ही एक दूसरे को जमकर निशाना बनाया और आजादी के आंदोलन में उनकी भूमिका को लेकर हमला किया लेकिन वंदे मातरम गीत ने आजादी के आंदोलन के दौरान देश को जिस तरह से एक सूत्र में पिराेये रखा उसकी सबने सराहना की और कहा कि यह गीत स्वतंत्रता सेनानियों के लिए उस दौरान गले का हार बन गया था और सब इस गीत को गाकर प्रेरणा लेते थे।
सदन में कांग्रेस के उप नेता गौरव गोगोई ने श्री मोदी पर कटाक्ष किया कि वह वंदेमातरम् पर चर्चा की शुरुआत करते हुए सिर्फ यही जताते रहे कि उनके दल की विचारधारा से जुड़े रहे लोग भी आजादी के आंदोलन का हिस्सा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष के लोग उनकी विचारधारा से जुड़े रहे लोगों में से एक भी नाम ऐसा नहीं बता पायेंगे, जिसने अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन में कभी शिरकत की हो।
उन्होंने सत्ता पक्ष से पूछा, "1942 के 'अंग्रेजों भारत छोड़ो' आंदोलन के दौरान आपके राजनीतिक पूर्वज कहां थे, सत्ता पक्ष की विचारधारा वाले लोगों ने न तो बंगाल को कभी समझा, न ही राष्ट्र को कभी समझा। भाजपा के लोग दिल्ली में बंगाली भाषा बोलने वालों को बंगलादेशी समझते हैं। "उन्होंने कहा कि कांग्रेस से जुड़े लोग अंग्रेजों के जुल्म से नहीं डरे और तिरंगा सिर पर रखकर वंदे मातरम् गीत का जयघोष करते हुए देश की आजादी के लिए लड़ते रहे। कांग्रेसजन और इसकी विचारधारा को मानने वाले आगे भी नागरिकों के अधिकार और समाज के हर तबके की बेहतरी के लिए काम करते रहेंगे।
उन्होंने कहा कि 1905 में कांग्रेस के वाराणसी अधिवेशन में वंदे मातरम् के गायन को आजादी के आंदोलन से जोड़ने का निर्णय लिया गया था। मुस्लिम लीग ने तब इसका विरोध किया, लेकिन कांग्रेस नहीं झुकी। आजादी के बाद भी मुस्लिम लीग ने इसे राष्ट्रीय गीत के रूप में मान्यता देने का विरोध किया, लेकिन उनकी बात नहीं मानी गयी। उन्होंने कहा कि चाहे जितनी विपरीत परिस्थितियां पेश आयें, कांग्रेस धर्मनिरपेक्ष, समावेशी और समरस समाज के लिए काम करती रहेगी।
श्री गोगोई ने कहा कि प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और कांग्रेस का कई बार नाम लिया। वह सदन में अपने लगभग हर संबोधन में पंडित नेहरू और कांग्रेस का नाम बार- बार लेकर इन्हें बदनाम करने की कोशिश करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि श्री मोदी चाहे जितनी बार पंडित नेहरू का नाम लें, लेकिन वह पूर्व प्रधानमंत्री के कार्यकलापों में एक भी 'काला दाग' नहीं निकाल पायेंगे।
श्री गोगोई ने कहा कि देश में भाषा अनेक हैं, धर्म अनेक हैं, लेकिन राष्ट्र ग्रंथ एक है, वह है संविधान। कांग्रेस संविधान की रक्षा की लड़ाई पूरी ताकत से लड़ती रहेगी।
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