अमृतसर , जनवरी 01 -- भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रवक्ता प्रोफेसर सरचंद सिंह ख्याला ने गुरुवार को 328 पावन स्वरूपों की गुमशुदगी के मामले में सतिंदर सिंह कोहली की संदिग्ध भूमिका तथा श्री अकाल तख़्त साहिब के आदेशों की अवहेलना कर दी गयी खुली चुनौती के पीछे शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल की संभावित संलिप्तता की गंभीर जांच की मांग की है।

उन्होंने कहा कि इस पूरे प्रकरण में सुखबीर सिंह बादल को श्री अकाल तख़्त साहिब में तलब कर जवाबदेह बनाया जाना चाहिए, ताकि सच्चाई सिख संगतों के सामने आ सके।

प्रो. ख्याला ने कहा कि 328 पावन स्वरूपों के मामले में सुखबीर सिंह बादल की भूमिका की निष्पक्ष एवं संपूर्ण जांच अब एक पंथक आवश्यकता बन चुकी है। उन्हें अकाल तख़्त साहिब में तलब कर जवाबदेह बनाना आवश्यक है, ताकि सिख कौम का पंथक संस्थाओं पर डगमगाया विश्वास पुनः स्थापित हो सके। उन्होंने कहा कि 328 पावन स्वरूपों की गुमशुदगी केवल प्रशासनिक लापरवाही का मामला नहीं है, बल्कि यह सिख कौम की धार्मिक आस्था से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील और गंभीर अपराध-बोध का विषय है। इस मामले में लगातार सामने आ रहे नये तथ्यों ने सिख संगतों के मन में गहरी और चिंताजनक शंकाएं उत्पन्न कर दी हैं।

श्री अकाल तख़्त साहिब द्वारा नियुक्त भाई ईश्वर सिंह जांच आयोग की रिपोर्ट स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि शिरोमणि कमेटी के खातों से संबंधित जिम्मेदारियों का निर्वहन करने वाली फर्म 'सतिंदर सिंह कोहली एंड एसोसिएट्स' द्वारा गंभीर लापरवाही बरती गयी। रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि यदि समय रहते इंटरनल कंट्रोल सिस्टम लागू किया जाता और खातों का कम्प्यूटरीकरण किया जाता, तो न तो लेजर में विसंगतियां रहतीं और न ही 2013-14 से लगातार श्री गुरु ग्रंथ साहिब के पावन स्वरूपों की संख्या में बढ़ोतरी-घटौती होती। इस लापरवाही ने शिरोमणि कमेटी की साख और विश्वसनीयता पर गंभीर दाग लगाया है।

इसी लापरवाही के आधार पर, श्री अकाल तख़्त साहिब से जारी आदेशों के अनुरूप, शिरोमणि कमेटी की अंतरिम कमेटी ने 27 अगस्त 2020 को प्रस्ताव संख्या 466 के माध्यम से सतिंदर सिंह कोहली एंड फर्म की सभी सेवाएं तत्काल समाप्त कर दीं तथा उनके द्वारा की गयी लापरवाही से हुए नुकसान की भरपाई हेतु पूर्व में दी गई 9 करोड़ रुपये से अधिक की अदायगी में से 75 प्रतिशत, अर्थात लगभग 7.20 करोड़ रुपये की वसूली के लिए कानूनी कार्रवाई की मंजूरी दी।

प्रो. ख्याला ने बताया कि यह पहली बार नहीं था जब कोहली की फर्म के विरुद्ध कार्रवाई हुई हो। ग्यारह जुलाई 2014 को भी शिरोमणि कमेटी की अंतरिम कमेटी ने प्रस्ताव संख्या 1542 के तहत गंभीर आरोपों के आधार पर उसका अनुबंध समाप्त किया था। आरोपों में कार्यालय को कम समय देना, शिरोमणि कमेटी प्रधान एवं अंतरिम कमेटी के निर्णयों की अवहेलना, खातों के कार्य की बजाय प्रशासनिक मामलों में अनावश्यक हस्तक्षेप और संस्था को बदनामी की ओर धकेलना शामिल था। हैरानी की बात यह है कि इतने गंभीर आरोपों के बावजूद कुछ समय बाद उसे पुनः बहाल कर दिया गया और वह लंबे समय तक बिना समुचित कार्य किए गुरु की गोलक से भुगतान लेता रहा। यह बहाली किसकी सिफारिश पर हुई-यह प्रश्न आज भी अनुत्तरित है। उन्होंने कहा कि अगस्त 2020 में भाई ईश्वर सिंह आयोग की रिपोर्ट के आधार पर 328 पावन स्वरूपों के मामले में 16 व्यक्तियों को दोषी ठहराया गया, जिनमें सतिंदर सिंह कोहली भी शामिल था। श्री अकाल तख़्त साहिब के आदेशानुसार, कोहली द्वारा प्राप्त नौ करोड़ रुपये से अधिक की राशि में से 75 प्रतिशत, अर्थात लगभग 7.20 करोड़ रुपये वापस लेने का निर्णय लिया गया, लेकिन राशि लौटाने के बजाय कोहली ने सिख गुरुद्वारा ज्यूडिशियल कमीशन का सहारा लेकर श्री अकाल तख़्त साहिब के आदेशों को सीधी चुनौती दी। यह मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है।

प्रो. ख्याला ने सवाल उठाया कि श्री अकाल तख़्त साहिब और शिरोमणि कमेटी के स्पष्ट आदेशों की अवहेलना के बावजूद न तो कोहली के विरुद्ध कोई कठोर नोटिस लिया गया और न ही कोई सख्त पंथक कार्रवाई की गयी। क्या यह सुखबीर सिंह बादल के साथ उसकी राजनीतिक नजदीकी और संरक्षण का परिणाम नहीं है? उन्होंने कहा कि यह कोई गुप्त तथ्य नहीं है कि सतिंदर सिंह कोहली को शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल का करीबी माना जाता है और वह उनके कारोबारी खातों को बतौर चार्टर्ड अकाउंटेंट संभालता रहा है। इसके अतिरिक्त, नॉर्थ अमेरिका में पीटीसी के माध्यम से गुरबाणी प्रसारण के अधिकार प्राप्त 'गुरबाज़ मीडिया कंपनी' का मालिक भी सतिंदर सिंह कोहली ही है, जबकि पीटीसी सुखबीर सिंह बादल की स्वामित्व वाली कंपनी है। ऐसी स्थिति में, श्री अकाल तख़्त साहिब के आदेशों को चुनौती देने वाले व्यक्ति की मीडिया कंपनी को श्री दरबार साहिब से गुरबाणी प्रसारण के अधिकार देना और अकाल तख़्त के आदेश की अवहेलना कर अदालत का दरवाजा खटखटाना, सीधे तौर पर अकाल तख़्त साहिब की सर्वोच्चता को चुनौती देने के समान है। ऐसे व्यक्ति से संबंध बनाए रखना भी अकाल तख़्त को चुनौती है।

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