बैतूल , दिसंबर 30 -- मध्यप्रदेश में सारनी स्थित सतपुड़ा ताप विद्युत गृह के फ्लाई ऐश डेम क्षेत्र से एक चौंकाने वाली और अहम जानकारी सामने आई है। शनिवार देर रात इसी क्षेत्र में एक वयस्क तेंदुए की मौजूदगी दर्ज की गई है। यह वही इलाका है, जहां प्रस्तावित सोलर प्लांट को लेकर लंबे समय से आपत्तियां जताई जा रही हैं। वाइल्डलाइफ एक्टिविस्ट आदिल खान ने तेंदुए की तस्वीर उपलब्ध कराते हुए क्षेत्र में वन्यजीव गतिविधियों की पुष्टि की है।

जिस भूमि को औद्योगिक उपयोग के लिए पुनः एमपीपीजीसीएल को सौंपने की मांग की जा रही थी, वहां अब वन्यजीवों की सक्रिय मौजूदगी सामने आने से सोलर परियोजना पर नए सिरे से सवाल खड़े हो गए हैं। यह क्षेत्र पहले पावर कंपनी के अधीन था, लेकिन पर्यावरणीय नियमों के तहत पौधरोपण के लिए वन विभाग को सौंपा गया था।

वन विभाग द्वारा वर्ष 2024-25 के दौरान करीब 106 हेक्टेयर क्षेत्र में लगभग 50 हजार पौधों का रोपण किया गया। कुछ ही समय में यह इलाका हरियाली से भर गया और धीरे-धीरे वन्यजीवों के लिए सुरक्षित आवास में तब्दील हो गया। अब यहां लकड़बग्घा, सियार, साही, खरगोश, मोर सहित कई प्रजातियों के पक्षी नियमित रूप से देखे जा रहे हैं। तेंदुए की मौजूदगी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह क्षेत्र एक उभरता हुआ वन्यजीव गलियारा बन चुका है।

पर्यावरण प्रेमियों और वन्यजीव कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि इस क्षेत्र में सोलर प्लांट जैसी भारी औद्योगिक गतिविधि शुरू की गई, तो इससे जैव विविधता को गंभीर नुकसान पहुंचेगा और मानव-वन्यजीव संघर्ष की आशंका भी बढ़ेगी। रात के समय तेंदुए की उपस्थिति इस बात का संकेत मानी जा रही है कि यह इलाका अब जंगल के विस्तार का रूप ले चुका है।

बताया जा रहा है कि विभिन्न आपत्तियों और पर्यावरणीय पहलुओं को देखते हुए फिलहाल यह भूमि एमपीपीजीसीएल को वापस नहीं सौंपी गई है। तेंदुए की तस्वीर सामने आने के बाद संभावना जताई जा रही है कि सोलर प्लांट परियोजना की अनुमति प्रक्रिया और अधिक जटिल हो सकती है।

स्थानीय नागरिकों का मानना है कि यह क्षेत्र अब केवल औद्योगिक संपत्ति नहीं, बल्कि प्रकृति की धरोहर बन चुका है। सतपुड़ा की गोद में पनप रही यह हरियाली और वन्यजीवों की वापसी को पर्यावरण संरक्षण की एक सफल मिसाल के रूप में देखा जा रहा है।

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