, Jan. 8 -- नयी दिल्ली, 08 जनवरी। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि सरकार सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु दर को 2030 तक 50 प्रतिशत कम करने के लक्ष्य के साथ 'जीरो फेटालिटी डिस्ट्रिक्ट' मॉडल लागू करेगी और इसके लिए जिलों को मुख्य इकाई बनाकर सड़क सुरक्षा में स्थायी बदलाव लाया जाएगा।

श्री गडकरी ने गुरुवार को राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों के सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रियों की दो दिन चली वार्षिक बैठक के बाद यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि बैठक में 12 मुद्दों पर विशेष चर्चा हुई जिसमें दुर्घटना की स्थिति में नकदी रहित इलाज पर जोर दिया गया। बैठक में बताया गया है कि यदि समय पर इलाज मिलता है तो दुर्घटना के घायलों में से 30 प्रतिशत लोगों की जान बचाई जा सकती है। उकना कहना था कि जो व्यक्ति दुर्घटना के घायल को अस्पताल पहुंचाएगा उसे 25 हजार रुपए का ईनाम दिया जाएगा और सड़क सुरक्षा निधि से डेढ़ लाख रुपए अस्पताल को सात दिन का भुगतान किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि इसके लिए पायलट परियोजना चल रही है और ये परियोजनाएं उत्तराखंड , हरियाणा, असम, पंजाब, राजस्थान आदि राज्यों में चल रही है। उनका कहना था कि देश में 22 लाख ड्राइवरों की कमी है और इसके लिए सरकार बेहतर ड्राइवर तैयार करेगी जिन्हें सरकार द्वारा खोले गये ट्रेनिंग सेंटर में ट्रेनिंग दी जाएगी।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इसके साथ ही घायलों का उपचार करने वाले अस्पताल को सड़क सुरक्षा निधि से 1.5 लाख रुपये का सात दिन का भुगतान किया जाएगा। यह पायलट परियोजना उत्तराखंड, हरियाणा, असम, पंजाब, राजस्थान आदि में शुरू की गई है। साथ ही 22 लाख ड्राइवरों की कमी को पूरा करने के लिए ट्रेनिंग सेंटर खोले जाएंगे।

भारत की अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं (स्टॉकहोम डिक्लेरेशन 2020 और यूएन सतत विकास लक्ष्य) का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि 63 प्रतिशत दुर्घटनाएं राष्ट्रीय राजमार्गों के बाहर होती हैं। शीर्ष 100 जिलों में 2023-2024 में 89 हजार से अधिक लोगों की मृत्यु हुई जिनमें ज्यादातर ओवरस्पीडिंग, लापरवाह ड्राइविंग और खतरनाक ओवरटेकिंग के कारण हुई हैं। रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि ज्यादातर सड़क दुर्घटनाएं दोपहर बाद 3 बजे से रात 12 बजे के बीच होती हैं। सड़क सुरक्षा के नये मॉडल में जिला मजिस्ट्रेट की अगुवाई में पुलिस, लोक निर्माण, स्वास्थ्य और परिवहन विभाग समन्वय करेंगे।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सड़क सुरक्षा के सारे उपाया सड़क इंजीनियरिंग सुधार, स्मार्ट ट्रैफिक प्रवर्तन, गोल्डन ऑवर में बेहतर इलाज और डेटा आधारित निर्णय पर ध्यान केंद्रित किया गया है। राज्य सरकारें इन सब उपायों में महत्वपवूर्ण भूमिका में होंगी और मंत्रालय तथा सेव लाइफ फाउंडेशन तकनीकी सहयोग देंगे। उन्होंने कहा कि केवल जागरूकता या चालान से नहीं, बल्कि ट्रॉमा केयर मजबूत करके और ईमानदार क्रियान्वयन से लाखों जानें बचाई जा सकती हैं।

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