नयी दिल्ली , फरवरी 08 -- हजरत ख्वाजा निजामुद्दीन औलिया महबूब इलाही की दरगाह के सज्जादानशीन ख्वाजा सैयद मोहम्मद निजामी को आज असर की नमाज के बाद ख्वाजा हॉल में सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया। जनाजे की नमाज दरगाह महबूब इलाही में ख्वाजा सैयद मिन्हाज-उल-इस्लाम निजामी ने पढ़ाई।
गौर करने वाली बात है कि ख्वाजा सैयद मोहम्मद निजामी का ताल्लुक एक सूफी, ज्ञानी और साहित्यिक परिवार से था। उनका खानदान दिल्ली की तहजीब और संस्कृति का झंडाबरदार रहा है। वह प्रकृति के चितेरे हजरत ख्वाजा सैयद हसन निजामी के पोते थे। साथ ही वह ख्वाजा सैयद हसन निजामी के भतीजे और सैयद मोहम्मद मेहदी निजामी के बेटे थे।
सैयद मोहम्मद निजामी सादगी पसंद थे और वे अपने बुजुर्गों की खानकाही परंपराओं के साथ-साथ उनके शैक्षिक और धार्मिक कामों को आगे बढ़ाने में जुटे रहते थे। ख्वाजा सैयद मोहम्मद निजामी के चाहने वालों और मुरीदों की बड़ी तादाद है।
उनके निधन को एक ऐसी क्षति बताया जा रहा है, जिसकी भरपाई नामुमकिन है। इस दुखद खबर के बाद उपमहाद्वीप की सभी प्रमुख खानकाहों और दरगाहों से शोक संदेश आ रहे हैं और दुख जताया जा रहा है।
उनके परिवार में उनकी पत्नी, दो बेटे, एक बेटी और उनकी मां हैं, जबकि उनके पिता सैयद मोहम्मद मेहदी का पहले ही निधन हो चुका है।
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