अमृतसर , जनवरी 22 -- पंजाब भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता एवं सिख स्टूडेंट्स फेडरेशन के पूर्व अध्यक्ष प्रो. सरचंद सिंह ख्याला ने गुरुवार को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट द्वारा 1984 के सिख विरोधी दंगों के दौरान दिल्ली के विकासपुरी और जनकपुरी में हुई हत्याओं के मामलों में कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को राहत दिए जाने पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है।

प्रो. ख्याला ने कहा कि यह फैसला न केवल 41 वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे पीड़ित परिवारों के साथ घोर अन्याय है, बल्कि भारतीय न्याय व्यवस्था की निष्पक्षता पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करता है। उन्होंने केंद्र सरकार, केंद्रीय जांच एजेंसियों और दिल्ली सरकार से मांग की कि विभिन्न अदालतों द्वारा बरी किये गये 1984 सिख जनसंहार के आरोपियों के खिलाफ तुरंत उच्चतम न्यायालय में स्पेशल लीव पिटीशन (एसएलपी) दाखिल कर मामले पूरी गंभीरता सेलड़े जायें।

उन्होंने कहा कि भले ही सज्जन कुमार को अन्य मामलों में पहले ही उम्रकैद की सजा हो चुकी है और वह जेल में बंद है, लेकिन सिख जनसंहार में उसकी भूमिका को देखते हुए वह मृत्युदंड का पात्र है। कांग्रेस ने सिख नरसंहार के दोषियों को राजनीतिक संरक्षण देकर न केवल कानून से बचाया, बल्कि उन्हें सरकार और पार्टी में महत्वपूर्ण पद देकर निर्दोष सिखों के घावों पर नमक छिड़कने का काम किया।

प्रो. ख्याला ने कहा कि यह ऐतिहासिक तथ्य है कि सज्जन कुमार ने भीड़ को उकसाकर निर्दोष सिखों का कत्लेआम करवाया। दिल्ली कैंट की पालम कॉलोनी में पांच सिखों की हत्या के बाद गुरुद्वारा जलाने के मामले में 17 दिसंबर 2018 को दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा दोषी ठहराया जाना तथा सरस्वती विहार में जसवंत सिंह और उनके पुत्र तरुणदीप सिंह को जिंदा जलाने के मामले में उम्रकैद की सजा यह सिद्ध करती है कि सज्जन कुमार 1984 सिख जनसंहार का मास्टरमाइंड था। ऐसी स्थिति में विकासपुरी और जनकपुरी मामलों में सबूतों की कमी का हवाला देकर उसे बरी किया जाना गंभीर चिंता का विषय है।

उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा 1984 से जुड़े कई मामलों में दिये गये फैसलों को पिछली केजरीवाल सरकार ने चुनौती नहीं दी।

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