नयी दिल्ली , जनवरी 06 -- मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मंगलवार को दिल्ली विधानसभा में कहा कि सिखों के नौवें गुरु गुरु तेग बहादुर ने धर्म और समाज की रक्षा के लिए सर्वोच्च कुर्बानी दी जो आज भी हमें सच्चाई और मानवीय मूल्यों की प्रेरणा देती है।

श्रीमती गुप्ता ने शहीदी दिवस पर सदन में चर्चा में कहा कि यह महान समागम सिखों के नौवें गुरु गुरु तेग बहादुर के 350वें शहीदी दिवस मनाया गया जो गुरु साहब की मेहरबानी से संभव हुआ है। इसमें लाखों लोगों ने उस समागम में हिस्सा लिया। जिस लाल किला से गुरु साहब से फरमान दिया गया उसी स्थान से गुरबानी के सुर सुनाई दे रहे थे और हजारों लोग लंगर चख रखे थे, यह हम सबके लिए गर्व की बात है। यह हमारा सौभाग्य है कि गुरु साहब की शहादत पर वर्तमान पीढी की तरफ से नमन कर पाये।

उन्होंने कहा कि हमें अपनी संस्कृति को सहेज कर रखना हमारा कर्तव्य है। इस महान बलिदान को जन जन तक पहुंचाने सभी के सहयोग से संभव हुआ है। जो देश अपना इतिहास भूल जाता है उसे कभी भी भविष्य में याद नहीं रखता है। उन्होंने कहा कि जिसे अपने पुरुखों पर नाज नहीं है उसका कोई नाम लेने वाला नहीं बचता है। विकास और विरासत के मार्ग पर दिल्ली सरकार काम कर रही है। इस तेज रफ्तार जिंदगी में करोड़ों लोग अपने गांव और शहर से दिल्ली में रोजगार के लिए आते हैं इसलिए उनको अपने जड़ों से जुड़ने का हक है। इसी को ध्यान में रखते हुए दिल्ली सरकार करोड़ों लोगों की आस्था का सम्मान करती है। इसी प्रकार कांवड़ यात्रा में दिल्ली सरकार ने पूरी सुविधाएं दी। सरकार ने हर राज्य के स्थापना दिवस को बड़े गर्व से मनाया। हमने पहली बार भव्यता के दिवाली मनाया। दिल्ली का अपना बहुत बड़ा इतिहास है। दिल्ली की अपनी बहुत बड़ी जिम्मेदारी है, यह भारत की आत्मा है। पिछले ग्यारह महीने में हमने दिल्ली शहर को मिनी इंडिया का रूप दिया। दिल्ली सरकार हर त्योहार को सिर्फ मनाती नहीं बल्कि उसे जीती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरु तेग बहादुर ने धर्म और समाज की रक्षा के लिए अपना शीश दिया। यह आज भी हमें सच्चाई और मानवीय मूल्यों की प्रेरणा देती है। गुरु साहब के एक पंथ के गुरु नहीं थे बल्कि भारत के साझा संस्कृति और मूल्यों प्रखर रक्षक थे। उनके जैसा व्यक्ति बिरले ही समाज में आता है जिसने अपना परिवार खो दिया। उनका जीवन एक कालखंड की कहानी नहीं बल्कि यह मानवता के साहस और धर्मनिष्ठा का शाश्वत आदर्श है। समय समय पर गुरुओं का याद करना हम सबका फर्ज है। गुरु तेग बहादुर सिंह को हिंद का चादर कहा गया।

उन्होंने कहा कि हम दिल्ली की जनता के साथ लगातार जुड़कर एक परिवार की तरह काम करते रहेंगे। दिल्ली वासियों के सुख दुख में खड़े रहेंगे।

कैबिनेट मंत्री कपिल मिश्रा ने नियम 270 के तहत गुरु तेग बहादुर के 350वें शहीदी दिवस पर सदन में वक्तव्य रखते हुए कहा कि देश दुनिया में गुरु तेगबहादुर की 350 साल के शहादत को मनाया जा रहा है। उन्होंने मानवता के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया है। इससे बड़े बलिदान का इतिहास दुनिया में कोई नहीं मिला है। उनके शहादत ने सिर्फ सिख समुदाय ही नहीं बल्कि पूरी मानवता को एक अहम संदेश देने का काम किया। उनके शहीदी दिवस के अवसर पर लाल किला में एक भव्य आयोजन किया गया जिसमें देश विदेश से लोगों ने सहभागिता की। इस कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और गृह मंत्री अमित शाह भी शामिल हुये।

पर्यावरण मंत्री मनजिंद्र सिंह सिरसा ने गुरु तेगबहादुर के महान शहादत को इस सदन में श्रद्धा सुमन अर्पित करने के लिए सभी का धन्यवाद किया। मुगल शासक औरंगजेब ने गुरु तेगबहादुर को धर्म बदलने के लिए कहा गया लेकिन उन्होंने धर्म परिवर्तन करने से इनकार कर दिया था। उन्हें डराने की कोशिश की लेकिन वह किसी भी अत्याचार की परवाह किये बिना शहादत दिया। उन्होंने कहा कि सरकार ने गुरु तेगबहादुर के 350 साल शहीदी अवसर पर समारोह मनाकर उन्हें सम्मानित करने का काम किया है। गुरु तेगबहादुर ने मानवता और धर्म की आजादी के लिए शहादत दी थी। इस देश की आजादी के बाद किसी ने गुरु तेगबहादुर को याद नहीं किया गया न ही साहबजादों को याद किया गया। दिल्ली के अन्दर बाबर और औरंगजेब के नाम पर सड़कों का नाम रखा गया, यह कैसी मानसिकता थी। हमें किताबों में भी मुगलों के बारे में बढाया गया। जिन लोगों ने इस देश की अस्मिता को मारा उसके बारे में पढाया जा रहा है लेकिन गुरु तेगबहादुर के बारे में नहीं पढाया गया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने पहली बार सिख गुरुओं का सम्मान करने की परंपरा शुरू की है।

भाजपा विधायक अरविंदर सिंह लवली ने कहा कि गुरु तेगबहादुर की 350वीं शहीदी दिवस जिस प्रकार मनाया गया उसके लिए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और कला संस्कृति मंत्री का धन्यवाद करते हैं। मुख्यमंत्री जिस प्रकार इस कार्यक्रम में सक्रिय रही उन्होंने सभी का दिल जीत लिया। उन्होंने कहा कि गुरु तेगबहादुर की शहादत की दुनिया में कोई दूसरा मिसाल नहीं है। मुगल शासक ने चार महीने तक गुरु तेगबहादुर को यातना दी लेकिन वह टस से मस नहीं हुये।

आम आदमी पार्टी के वीरेंद्र कादियान ने कहा कि शहीदी दिवस जो मनाया गया वह सराहनीय है। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में सिख भाइयों ने जो सेवा की वह गुरुओं के बताये गये रास्ते हैं। उन्होंने कहा कि सभी धार्मिक पर्व मनाया जाना चाहिए इससे अच्छा संदेश जाता है। हर आदमी अपने हिसाब से त्योहार मनाया जाता है इसमें राजनीति नहीं करनी चाहिए। पंजाब की सरकार ने जगह जगह भव्यता के साथ शहीदी दिवस मनाया गया। हमें गुरु तेगबहादुर की शिक्षा पर अमल करना चाहिए न कि सिर्फ उनकी तारीफें करनी चाहिए।

विधानसभा अध्यक्ष विजेन्द्र गुप्ता ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि गुरुओं की कुर्बानी पूरी दुनिया के लिए हुआ था इसलिए सभी को उनके लिए नतमस्तक होना चाहिए।

भाजपा विधायक तरविन्द्र सिंह मारवाह ने कहा कि गुरु तेगबहादुर ने अपनी कुर्बानी के साथ साथ अपने परिजनों की कुर्बानी दी है। पूरी दुनिया के इतिहास में एक भी परिवार ने इतनी कुर्बानियां नहीं दी गयी जितनी कुर्बानियां गुरु तेग बहादुर के परिवार ने दी थी। गुरु तेग बहादुर ने कुर्बानी अपने लिए नहीं बल्कि समाज के लिए दी है। सिख समाज के लिए बड़े गर्व की बात है कि हमारे गुरुओं ने किया है। मुगल शासकों से गुरुओं ने कड़ा मुकाबला किया था।

आप के अजय दत्त ने कहा कि गुरु तेग बहादुर के शहीदी दिवस को दिल्ली के साथ ही पंजाब सरकार ने धूमधाम से मनाया जो बहुत ही सराहनीय कार्य है। उन्होंने कहा कि इस देश में जब जब जुल्म हुआ है सभी जाति धर्मों के लोगों ने संघर्ष की और शहादत दी है।

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