नैनीताल 21फरवरी (वार्ता) उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति को जीवंत रखने में प्रदेश की कई महिला कलाकार अहम भूमिका निभा रही हैं।
अलग-अलग जिलों से जुड़ी दीपा चौहान, मीना बिष्ट और इंदु चौहान आज अपनी मधुर आवाज के जरिए कुमाऊं और गढ़वाल की पारंपरिक सगुन आखर गीतों की परंपरा को आगे बढ़ाने का सराहनीय कार्य कर रही हैं। उत्तराखंड में शादी-ब्याह और मांगलिक अवसरों पर सगुन आखर गीतों की विशेष सांस्कृतिक महत्ता रही है,ये गीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं होते, बल्कि उनमें लोक परंपराएं, आशीर्वाद और सामाजिक भावनाएं भी समाहित होती हैं,आधुनिकता के इस दौर में जहां पारंपरिक लोकगीत धीरे-धीरे कम होते जा रहे हैं, वहीं दीपा चौहान, मीना बिष्ट और इंदु चौहान जैसे कलाकार इन गीतों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।
तीनों कलाकार कुमाऊं और गढ़वाल क्षेत्र में आयोजित होने वाले विवाह समारोहों, धार्मिक कार्यक्रमों और मांगलिक आयोजनों में सगुन आखर गीत गाकर लोगों को अपनी संस्कृति से जोड़ने का काम कर रही हैं,उनकी सुरीली प्रस्तुति और पारंपरिक अंदाज लोगों को खासा प्रभावित कर रहा है,यही वजह है कि अब शादी-ब्याह के कार्यक्रमों में इनकी मांग लगातार बढ़ती जा रही है और लोग विशेष रूप से इन्हें मांगलिक गीत गाने के लिए आमंत्रित करते हैं।
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