नयी दिल्ली , नवंबर 12 -- भारत की यात्रा पर आये सऊदी अरब के निवेश मंत्री खालिद अल फलीह ने बुधवार को राजधानी में वित्त एवं कॉर्पोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के साथ अलग अलग बैठकें की तथा द्विपक्षीय आर्थिक एवं व्यापारिक सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा की।
वित्त मंत्री श्रीमती सीतारमण के साथ सऊदी अरब के मंत्री की बैठक के बारे में वित्त मंत्रालय ने सोशल मीडिया मंच एक्स के अपने पृष्ठ पर एक पोस्ट में बताया कि दोनों नेताओं ने दोनों पक्षों के अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में द्विपक्षीय निवेश संधि (बीआईटी) पर चर्चा की गयी और एक दूसरे के बीच प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एपडीआई) के मजबूत संबंधों को आगे और विस्तार देने तथा आपसी सहयोग बढ़ाने के लिए निवेश संधि के लिए चर्चाओं को जल्द से जल्द पूरा किये जाने की इच्छा जतायी है।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री गोयल ने सऊदी अरब के निवेश मंत्री के साथ हुई मुलाकात पर खुशी जाहिर करते हुए कहा, ' हमने भारत-सऊदी अरब के आर्थिक संबंधों को और गहरा करने, तकनीक, ऊर्जा, बुनियादी ढाँचे और स्टार्टअप सहित अन्य क्षेत्रों में व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के तरीकों पर चर्चा की।"वाणिज्य मंत्री ने कहा कि भारत और सऊदी अरब के बीच साझेदारी आपसी विश्वास और साझा समृद्धि की भावना पर आधारित होने से लगातार मजबूत होती जा रही है।
वर्ष 2019 में गठित भारत-सऊदी अरब रणनीतिक भागीदारी परिषद को विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ाने के उपायों पर कार्य करने की जिम्मेदारी दी गयी है। दोनों देशों ने निवेश पर उच्च स्तरीय कार्यबल भी बनाया है जिसका उद्देश्य भारत में ऊर्जा, तकनीक, अवसंरचना और अन्य प्रमुख क्षेत्रकों में सऊदी अरब के 100 अरब डालर डॉलर के निवेश के प्रस्ताव को तेजी से आगे बढ़ाना है।
वित्त वर्ष 2024-25 में भारत और अपनी अर्थव्यवस्था का विविधीकरण कर रहे तेल और गैस के प्रमुख उत्पादक एवं निर्यातक सऊदी अरब के बीच 41.88 अरब डॉलर का व्यापार हुआ था रहा, जिसमें भारत से निर्यात 11.76 अरब डॉलर का निर्यात और सऊदी अरब से आयात 30.12 अरब डॉलर का था। भारत वहां से मुख्य रूप से कच्चे तेल और पेट्रोकेमिकल उत्पादों का आयात करता है, जबकि सऊदी अरब भारत के इंजीनियरिंग सामान, वस्त्र और खाद्य उत्पादों जैसे कई क्षेत्रों से सामान खरीदता है। हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय यात्राओं का सिलसिला बढ़ा है। सऊदी अरब के साथ व्यापार दोनों देशों की ऊर्जा सुरक्षा और खाद्य सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान करता है।
सऊदी अरब अपनी खनिज तेल आधारित अर्थव्यवस्था को पिछले कुछ वर्षों से अन्य क्षेत्रों में भी फैलाने के लिए व्यापक सुधार कार्यक्रम लागू करने में लगा है।
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