लखनऊ , जनवरी 14 -- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) ने बुधवार को कहा कि संभल में 24 नवंबर 2024 को हुई हिंसा में अदालत ने तत्कालीन सीओ अनुज चौधरी, कोतवाल सहित 20 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है जिससे प्रदेश सरकार का झूठ उजागर हुआ है।

पार्ट के कार्यकारी राज्य सचिव ईश्वरी प्रसाद कुशवाहा ने कहा कि कोर्ट के फैसले से यह पुख्ता हुआ है कि संभल हिंसा राज्य प्रायोजित थी। संभल की शाही जामा मस्जिद को 'हरिहर मंदिर' बताकर विवाद खड़ा करने के प्रकरण में पांच मुस्लिम युवक मारे गए थे। सभी को गोली लगी थी, लेकिन पुलिस ने खुद की गोली से मौतें होने से इनकार किया था। राज्य सरकार ने भी पुलिस की बात को ही दोहराया था। उल्टे आरोप प्रदर्शनकारियों पर ही मढ़ दिया गया था कि उन्हीं की ओर से चलाई गई गोली से मौतें हुईं। पुलिस जांच में पुलिसकर्मियों को क्लीन चिट दी गई थी।

श्री कुशवाहा ने कहा कि संभल की सीजेएम कोर्ट द्वारा एक मृतक लड़के के पिता की याचिका पर सुनवाई के बाद मंगलवार को दिए फैसले से स्पष्ट हो गया कि पुलिस और सरकार द्वारा स्थापित किये गए आख्यान में सच को छुपाया गया। मामले की जांच के लिए सरकार द्वारा गठित न्यायिक आयोग ने भी झूठ नहीं पकड़ा। कोर्ट ने आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरु करने का आदेश दिया है। लेकिन संभल पुलिस अधीक्षक का यह कथन की उच्चतर न्यायालय में इस फैसले के खिलाफ अपील होने तक एफआईआर नहीं दर्ज की जाएगी, न्यायपालिका की अवहेलना है।

उल्लेखनीय है कि संभल में एक हिन्दू महंत की याचिका पर सिविल अदालत ने शाही जामा मस्जिद का 'कमिश्नर एडवोकेट सर्वे' का आदेश पारित किया था, जिस पर 19 नवंबर 2024 को सर्वे शांतिपूर्ण तरीके से सम्पन्न हुआ। मामला तब भड़का जब 24 नवंबर को सर्वे टीम दोबारा सर्वे करने शाही जामा मस्जिद पहुंची और मौके पर श्रीराम के नारे लगाए गए।

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