नयी दिल्ली , फरवरी 9 -- पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने देश में 2006-16 के दौरान तेल और गैस की खोज और उत्पादन के कार्य की उपेक्षा के लिए पिछली सरकारों की आलोचना की और कहा कि मोदी सरकार ने आने के बाद इस क्षेत्र में नीतियों में बदलाव किया और काम तेज किया।
उन्होंने राज्य सभा में प्रश्नकाल के दौरान अंडमान बेसिन क्षेत्र में तेल और गैस के स्रोतों की खोज की प्रगति के बारे में पूछे गए एक अनुपूरक सवाल के जवाब में कहा, '' 2006-16 तक खोज और उत्पादन का काम उपेक्षित रहा। (उनको सरकारों में बैठे लोगों को) समझा दिया गया था कि दुनिया में तेल पर्याप्त मात्रा में उलब्ध है और आयात से ही काम चल सकता है। " पेट्रोलियम मंत्री ने आयात लॉबी के प्रभाव की ओर संकेत करते हुए कहा, ' उनकी सोच राष्ट्रहित में नहीं थी।'पेट्रोलियम मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार ने आकर तेल और गैस की खोज ओर उत्पादन के काम पर ध्यान दिया। राजस्व में हिस्सेदारी का मॉडल लागू किया गया। उन्होंने कहा कि अंडमान क्षेत्र में खोज के लिए चार कुएं खोदे गये हैं। इन सभी में तेल और गैस मिला है। लेकिन ऐसे स्थान की खोज करने की जरूरत है जहां आर्थिक दृष्टि से अच्छा भंडार प्राप्त हो सके।
श्री पुरी ने समुद्र मंथन कार्यक्रम की एक समीक्षा बैठक का उल्लेख करते हुए कहा कि उसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, '' 125 कुएं खोदने की जरूरत है तो खोदो।''पेट्रोलियम मंत्री ने कहा कि तेल खोज और निकासी का काम पूंजी-केन्द्रित है, एक-एक कुएं की लागत औसतन 10 करोड़ डालर तक पड़ती है। उन्होंने गुयाना का उदाहरण दिया, जहां 46 कुएं खोदने का काम बेकार हो गया लेकिन 47 वें कुएं में जो भंडार मिला उससे वहां की तस्वीर बदल गयी।
उन्होंने कहा कि अंडमान का क्षेत्र खनिज ऊर्जा की दृष्टि से समृद्ध है। उन्होंने कहा कि कृष्णा गोदावरी बेसिन और बांबे हाई क्षेत्र में भी उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रयास चल रहे हैं और सफलता मिल रही है।
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