सुकमा , नवंबर 07 -- छत्तीसगढ़ में माओवाद प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना हमेशा से एक चुनौतीपूर्ण कार्य रहा है, लेकिन सुकमा प्रशासन ने इस मुश्किल को अवसर में बदलते हुए एक नई पहल की है। कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव के निर्देशन में स्वास्थ्य विभाग ने 'नियद नेल्लानार योजना' के तहत माओवाद प्रभावित कोंटा विकासखंड के 125 गांवों में घर-घर जाकर स्वास्थ्य सर्वे किया है।

सीएमएचओ डॉ. आर.के. गुप्ता के मार्गदर्शन में चलाए गए इस अभियान का उद्देश्य दुर्गम और पहुंचविहीन इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं को आम जनता के द्वार तक पहुंचाना है। यह पहल इस दृष्टि से विशेष है क्योंकि इन इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बेहद सीमित रही है।

कोंटा क्षेत्र की भौगोलिक और सुरक्षा चुनौतियों के बावजूद स्वास्थ्यकर्मियों की टीमों ने गांव-गांव पहुंचकर लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया। इस दौरान 'संपूर्ण नेत्र सुरक्षा कार्यक्रम' पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया। बीएमओ कोंटा डॉ. दीपेश चंद्राकर ने बताया कि विपरीत परिस्थितियों के बावजूद स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने घर-घर जाकर नेत्र जांच की और मोतियाबिंद से पीड़ित लोगों का विस्तृत डेटा तैयार किया।

सर्वे में 624 मोतियाबिंद मरीज चिन्हांकित किए गए हैं, जिनमें 132 मरीज एक आंख से और 492 मरीज दोनों आंखों से प्रभावित पाए गए हैं।

जिला प्रशासन ने इन सभी मरीजों के लिए विशेष मोतियाबिंद शिविर आयोजित करने की योजना बनाई है। ये शिविर जिला अस्पताल में लगाए जाएंगे, जहां सभी मरीजों का निःशुल्क इलाज और ऑपरेशन किया जाएगा। मरीजों के लिए आने-जाने, रहने और भोजन की संपूर्ण व्यवस्था प्रशासन की ओर से की जाएगी।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित