पटना , नवंबर 04 -- बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में जहां करोड़ों और अरबों की संपत्ति वाले उम्मीदवार सुर्खियों में हैं, वहीं कुछ ऐसे प्रत्याशी भी हैं जिन्होंने लोकतंत्र की असली भावना को जीवंत कर दिया है।

भागलपुर जिले के पीरपैंती विधानसभा क्षेत्र से बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के उम्मीदवार सुनील कुमार चौधरी ने अपनी कुल संपत्ति शून्य घोषित कर सबका ध्यान खींचा है।

अति- सीमित संसाधनों के बावजूद चुनावी मैदान में उतरने का उनका साहस इस बात का प्रमाण है कि राजनीति आज भी आम जनता के बीच से निकले लोगों की हो सकती है।

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार, सबसे कम संपत्ति वाले प्रत्याशियों की सूची में सुरेश राजवंशी, मूलनिवासी समाज पार्टी के प्रत्याशी हैं, जो गया जी जिले के वजीरगंज विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे हैं। उनकी कुल संपत्ति मात्र 1,100 बताई गई है, जिसमें 1,100 रुपये की चल संपत्ति और अचल संपत्ति शून्य है।

इस सूची में अगला नाम पंकज कुमार राम, निर्दलीय प्रत्याशी, मधुबनी जिले के बेनीपट्टी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव मैदान में हैं। उनके पास केवल 2,000 रुपये की चल संपत्ति है, जबकि अचल संपत्ति शून्य है।

राजमंगल प्रसाद, निर्दलीय उम्मीदवार, पूर्वी चंपारण जिले के पिपरा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे हैं। उनके पास भी 2,000 रुपये की कुल संपत्ति घोषित है, जिसमें अचल संपत्ति शून्य है।

इन उम्मीदवारों ने अपनी आर्थिक सीमाओं के बावजूद लोकतंत्र के इस महापर्व में भागीदारी कर यह संदेश दिया है कि राजनीति सिर्फ धनबल वालों की नहीं, बल्कि जनबल और ईमानदारी की भी हो सकती है। ये गरीब प्रत्याशी जनसंपर्क, विश्वास और सादगी को अपना चुनावी हथियार बनाये हुये हैं और तनकर चुनावी मैदान में डटे हुये हैं।

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