धार , दिसंबर 05 -- मध्यप्रदेश के आदिवासी बहुल धार जिले में शहरी क्षेत्रों में आमजन को सुलभ और किफायती स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्थापित किए गए संजीवनी क्लीनिक स्टाफ की कमी के कारण अपनी पूरी क्षमता से सेवाएं नहीं दे पा रहे हैं। जिले में 15वें वित्त आयोग के अंतर्गत स्वीकृत 12 संजीवनी क्लीनिकों में से 8 का संचालन किया जा रहा है, जबकि 4 क्लीनिकों का निर्माण अभी पूरा नहीं हो सका है।
संचालित 8 क्लीनिकों में से केवल 4 में ही मेडिकल ऑफिसर पदस्थ हैं, जबकि शेष 4 क्लीनिक नर्सिंग स्टाफ के भरोसे चल रहे हैं। शासन द्वारा प्रत्येक संजीवनी क्लीनिक के निर्माण पर लगभग 25 लाख रुपये व्यय किए गए हैं। धार शहर में दो तथा मनावर, राजगढ़, कुक्षी, सागौर, पीथमपुर और बगदुन में एक-एक संजीवनी क्लीनिक स्वीकृत किए गए थे, जिनका उद्देश्य जिला अस्पतालों पर बढ़ते दबाव को कम करना और लोगों को उपचार के लिए दूर न जाना पड़े, यह सुनिश्चित करना था।
नौगांव स्थित संजीवनी क्लीनिक में सेवाएं बेहतर होने के साथ मरीजों की संख्या में वृद्धि दर्ज की गई है। यहां प्रतिदिन 50 से 70 मरीज ओपीडी में पहुंच रहे हैं। मरीजों को निश्शुल्क दवाइयां उपलब्ध कराई जा रही हैं तथा बीपी और शुगर जांच सहित शिविरों के माध्यम से उपचार की सुविधा दी जा रही है। आने वाले दिनों में यहां बोतल लगाने की सुविधा भी शुरू की जाएगी। गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच भी की जा रही है।
वहीं इंदौर नाका स्थित संजीवनी क्लीनिक नए भवन के निचले हिस्से से संचालित हो रहा है, जबकि ऊपरी हिस्सा पूरी तरह तैयार होने के बावजूद मेडिकल ऑफिसर की अनुपस्थिति के कारण यहां मरीजों की संख्या बेहद कम बनी हुई है। क्लीनिक में भर्ती के लिए बेड की सुविधा उपलब्ध है, लेकिन स्टाफ कमी के चलते सेवाएं सीमित हैं।
सीएमएचओ कार्यालय धार की शहरी सहायक कार्यक्रम प्रबंधक वंदना वर्मा ने बताया कि संचालित आठ संजीवनी क्लीनिकों में से चार में मेडिकल ऑफिसर पदस्थ हैं, जबकि शेष चार में शीघ्र नियुक्ति की प्रक्रिया जारी है। उन्होंने कहा कि सभी क्लीनिकों में मरीजों को बेहतर उपचार और निश्शुल्क दवाइयां उपलब्ध कराई जा रही हैं।
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