मुंबई , जनवरी 25 -- शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने रविवार को खुलासा किया कि पिछले वर्ष दीपावली से कुछ समय पहले ही उन्हें पेट के कैंसर का पता चला था, जिसकी वजह से उन्हें कई हफ्तों तक लोगों से दूरी बनानी पड़ी थी।

श्री राउत ने यहां संवाददाताओं से अपने स्वास्थ्य, ठीक होने की प्रक्रिया और राजनीतिक जिम्मेदारियों के बारे में बातचीत के दौरान कहा कि उन्होंने शुरुआती लक्षणों को नज़रंदाज़ किया था। उनका मानना था कि उनको होने वाली परेशानी उनकी व्यस्त दिनचर्या का नतीजा है। जब उनके भाई सुनील राउत ने उनसे खून की जांच करवाने के लिये कहा, तब उन्हें कैंसर के बारे में पता चल सका।

श्री राउत ने बताया कि कीमोथेरेपी और रेडिएशन सहित उनका उपचार दीपावली के दौरान ही शुरू हो गया था, जिससे किसी भी तरह से उत्सव मनाने की कोई गुंजाइश नहीं बची। श्री राउत ने उपचार प्रक्रिया को अत्यंत पीड़ादायक बताते हुए कहा कि इसका उन पर गहरा शारीरिक प्रभाव पड़ा।

उन्होंने कहा कि करीब छह सप्ताह तक वह या तो घर पर रहे या अस्पताल में भर्ती रहे। इस दौरान गहन चिकित्सकीय उपचार से गुजरना पड़ा। श्री राउत ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि इलाज बीमारी से भी अधिक कठिन था। उन्होंने बताया कि उपचार के बाद के दौर में पानी पीने जैसी सामान्य गतिविधियां भी दर्दनाक हो गयी थीं। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया बेहद कठिन रही, लेकिन अब वह धीरे-धीरे स्वस्थ हो रहे हैं और पूरी तरह उसी पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

इस बीच श्री राउत ने कहा कि हालिया चुनाव परिणामों से यह स्पष्ट है कि मराठी मतदाता लगातार उनकी पार्टी के साथ मजबूती से खड़े हैं। उनका दावा था कि सत्तारूढ़ भाजपा और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना को जो सीटें मिलीं, वे मुख्यतः गैर-मराठी मतदाताओं बहुल क्षेत्रों में थीं। श्री राउत ने कहा कि विशेष रूप से मुंबई में मराठी भाषी मतदाताओं का समर्थन उन्हें व्यक्तिगत संतोष देता है। उन्होंने दावा किया कि तमाम राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद 'भूमिपुत्र' यूबीटी के प्रति वफादार बने रहे।

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