चेन्नई , दिसंबर 29 -- भारतीय वायुसेना के बेंगलुरु स्थित सॉफ्टवेयर विकास संस्थान ने हवाई अनुप्रयोगों के लिए स्वदेशी डिजिटल सुरक्षित संचार प्रणाली के संयुक्त डिज़ाइन और विकास के उद्देश्य से आईआईटी (भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान) मद्रास के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।
यह सहयोग आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे रक्षा प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा और भारत की रणनीतिक क्षमताएं मज़बूत होंगी। समझौता ज्ञापन पर सॉफ्टवेयर विकास संस्थान के कमांडेंट एयर वाइस मार्शल आर. गुरुहरि, आईआईटी-मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी. कामकोटी तथा प्रवर्तक टेक्नोलॉजीज़ फाउंडेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉक्टर एम. जे. शंकर रमन ने हस्ताक्षर किए।
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि इस साझेदारी के माध्यम से भारतीय वायुसेना का उद्देश्य आईआईटी-मद्रास के सहयोग से नेटवर्किंग और एन्क्रिप्शन से जुड़े उन्नत एल्गोरिद्म विकसित करना है। ये प्रणालियां गतिशील हवाई वातावरण में सुरक्षित, विश्वसनीय और उच्च प्रदर्शन वाले आंकड़ों के आदान-प्रदान के लिए बेहद ज़रूरी हैं। इन्हें आधुनिक सैन्य अभियानों और नेटवर्क आधारित युद्ध प्रणाली के लिए जरूरी माना जाता है। इस तकनीक को स्वदेशी रूप से विकसित कर आयात की गयी प्रणालियों पर निर्भरता कम करने, तकनीकी संप्रभुता को बढ़ाने और देश की सेनाओं की परिचालन दक्षता को मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया है।
एयर वाइस मार्शल गुरुहरि ने कहा कि आईआईटी-मद्रास के साथ यह साझेदारी महत्वपूर्ण रक्षा संचार तकनीकों में पूर्ण आत्मनिर्भरता हासिल करने की दिशा में एक दूरदर्शी कदम है। शैक्षणिक उत्कृष्टता और परिचालन विशेषज्ञता को एक साथ लाकर नवोन्मेषी स्वदेशी समाधान विकसित किए जाएंगे, जिससे हवाई बलों की क्षमताएं बढ़ेंगी और आत्मनिर्भर भारत को मजबूती मिलेगी।
प्रोफेसर कामकोटी ने कहा कि भारतीय वायुसेना के सॉफ्टवेयर विकास संस्थान के साथ यह सहयोग शैक्षणिक जगत और रक्षा संस्थानों के बीच समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि आईआईटी-मद्रास उन्नत संचार तकनीकों और साइबर सुरक्षा में अपनी विशेषज्ञता के माध्यम से मजबूत स्वदेशी समाधान विकसित करने में योगदान देने पर गर्व महसूस करता है। यह पहल आत्मनिर्भर भारत के उद्देश्य के अनुरूप है और राष्ट्रीय सुरक्षा को सशक्त बनाने में सहायक होगी।
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