अमृतसर , जनवरी 6 -- शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के लापता 328 पवित्र स्वरूपों से संबंधित मामले में श्री अकाल तख्त साहिब के आदेशानुसार एसजीपीसी पुलिस प्रशासन को किसी भी प्रकार का सहयोग नहीं देगी और न ही कोई रिकॉर्ड उपलब्ध कराएगी।
शिरोमणि कमेटी के सचिव प्रताप सिंह की अध्यक्षता में हुई अधिकारियों की बैठक के बाद जारी एक बयान में यह स्पष्ट किया गया कि इस पूरे मामले पर सिख संगठन का रुख स्पष्ट है कि श्री अकाल तख्त साहिब की जांच रिपोर्ट के अनुसार इस मामले में आरोपी कर्मचारियों के खिलाफ शिरोमणि कमेटी द्वारा कार्रवाई पूरी कर ली गई है। इस मामले में श्री अकाल तख्त साहिब का आदेश सिख संगठन के लिए अंतिम है, जिसके अनुसार सरकार को कोई सहयोग नहीं दिया जा सकता।
श्री सिंह ने बताया कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की पवित्र प्रतिमाओं का निजी स्वार्थ के लिए इस्तेमाल करने और रिकॉर्ड में हेराफेरी करने वाले तीन कर्मचारी कंवलजीत सिंह, बाज सिंह और दलबीर सिंह हैं। उन्होंने अपने लालच के कारण शिरोमणि कमेटी के पूरे प्रशासन को बदनाम किया। शिरोमणि कमेटी के नियमों के अनुसार, जब श्रद्धालु या गुरुद्वारा समिति पवित्र प्रतिमाओं की मांग करते हैं, तो नियमों के अनुसार, उपदेशक की जांच रिपोर्ट और शिरोमणि कमेटी के सदस्य की सिफारिश के बाद सचिव स्तर के अधिकारी द्वारा अनुमोदन दिया जाता है। इसके बाद, पवित्र प्रतिमा देते समय रसीद जमा की जाती है और उसे रिकॉर्ड में दर्ज किया जाता है। इस प्रक्रिया की अनदेखी करते हुए, प्रकाशन विभाग में तैनात तत्कालीन कर्मचारियों ने इस जिम्मेदारी का निर्वहन किया। इसलिए, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई क्योंकि वे प्रत्यक्ष रूप से दोषी थे और इसके साथ ही कई वरिष्ठ अधिकारियों को भी प्रशासनिक कार्रवाई का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि सिख संगठन सिख गुरुद्वारा अधिनियम की भावना के अनुरूप कार्य करता है और इसमें कार्यरत प्रत्येक कर्मचारी की अपनी विशिष्ट जिम्मेदारी होती है। यदि कोई इसका उल्लंघन करता है, तो संगठन को सेवा नियमों के अनुसार उसके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई करने का अधिकार है।
शिरोमणि कमेटी के अधिकारियों ने पंजाब आम आदमी पार्टी (आप) के नेताओं द्वारा दिए जा रहे निराधार बयानों को सिख संस्था को बदनाम करने का जानबूझकर किया गया कृत्य बताया। श्री सिंह ने कहा कि शिरोमणि कमेटी पूरे सिख समुदाय की है और इसके खिलाफ झूठा प्रचार सिखों की एक सम्मानित संस्था को ठेस पहुंचाएगा। उन्होंने कहा कि मीडिया से बात करते समय आम आदमी पार्टी के नेता श्री बलतेज पन्नू यह नहीं भूल रहे हैं कि उनके शब्द किसी भी तरह से तर्कहीन हैं। मनमाने बयानों से सिख संस्था की परंपराओं और प्रतिष्ठा को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पवित्र स्वरूप संगत को निर्धारित नियमों के अनुसार दिए जाते हैं। आम आदमी पार्टी के नेता का यह बयान कि शिरोमणि कमेटी के अध्यक्ष के पास पवित्र स्वरूपों से संबंधित डायरी है, संगत को गुमराह कर रहा है। डायरी आदि के बारे में जो प्रचार किया जा रहा है, वैसा कोई कानून नहीं है।
प्रकाशन विभाग में अलग-अलग समय पर प्रभारी और उप सचिव के पद पर कार्यरत रहे गुरिंदर सिंह, गुरनाम सिंह और मनजीत सिंह ने बताया कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के प्रति आदर को ध्यान में रखते हुए, पवित्र स्वरूप दान करने के लिए कोई डायरी या पर्ची की व्यवस्था नहीं है। पवित्र स्वरूपों का रिकॉर्ड केवल विभागीय बहीखातों में ही रखा जाता है और दान की रसीद जारी कर दी जाती है।
एसजीपीसी के अधिकारियों ने सरकार से अपील की है कि वह एसजीपीसी को सीधे तौर पर निशाना न बनाए, क्योंकि श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा की गई जांच के अनुसार, सिख संगठन ने इस गंभीर मामले में कार्रवाई करने में कोई ढिलाई नहीं बरती। उन्होंने एक बार फिर स्पष्ट किया कि इस मामले में श्री अकाल तख्त साहिब के आदेशों के अनुसार, एसजीपीसी सरकार और पुलिस प्रशासन को किसी भी प्रकार का सहयोग नहीं दे सकती, जिसे सरकार को समझना चाहिए।
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