अमृतसर , जनवरी 05 -- श्री अकाल तख्त साहिब की सर्वोच्च सत्ता और सिख गुरुओं द्वारा आशीर्वाद प्राप्त 'गुरु की गोलक' (दसवंध) के सिद्धांत को चुनौती देने वाली बार-बार अत्यधिक आपत्तिजनक टिप्पणियों के संबंध में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को 15 जनवरी को श्री अकाल तख्त साहिब के सचिवालय में पेश होने के लिए तलब किया गया है।
श्री अकाल तख्त साहिब के कार्यकारी जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह गड़गज्ज ने सोमवार को कहा कि यह कार्रवाई मुख्यमंत्री भगवंत मान के हाल ही में सामने आये एक अत्यधिक आपत्तिजनक वीडियो के मद्देनजर भी शुरू की गयी है, जिसमें उन्हें सिख गुरुओं और जरनैल सिंह खालसा भिंडरांवाले की तस्वीरों के साथ बेहद आपत्तिजनक गतिविधि करते हुए देखा जा रहा है।
मीडिया को संबोधित करते हुए जत्थेदार गड़गज्ज ने कहा कि मुख्यमंत्री पंजाब में एक उच्च संवैधानिक पद पर हैं, और उनके सिख विरोधी बयान उनके अंदर सत्ता के अहंकार को दर्शाते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सिख परंपरा के अनुसार, उन्हें श्री अकाल तख्त साहिब के सामने पेश नहीं किया जा सकता है, इसलिए उन्हें 15 जनवरी, 2026 को श्री अकाल तख्त साहिब के सचिवालय में व्यक्तिगत रूप से पेश होकर अपना स्पष्टीकरण देने के लिए तलब किया गया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब सिख रहित मर्यादा को चुनौती या सिख भावनाओं पर किसी भी हमले को कभी बर्दाश्त नहीं कर सकते।
जत्थेदार गड़गज्ज ने कहा कि श्री मान का जो बेहद आपत्तिजनक वीडियो सामने आया है, जिससे सिखों की भावनाएं आहत हुई हैं, वह साफ तौर पर उनकी सिख विरोधी मानसिकता को दिखाता है। उन्होंने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब इस वीडियो की फोरेंसिक जांच करवाएगा, और अगर वीडियो असली पाया गया, तो पंथिक परंपराओं के अनुसार श्री मान के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस बीच, जत्थेदार गड़गज्ज ने पूछा कि मौजूदा पंजाब सरकार को साफ तौर पर बताना चाहिए कि 2015 में बरगाड़ी में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी के मामलों में, जो डेरा सिरसा प्रमुख गुरमीत राम रहीमके कहने पर हुई थी, और 2017 में मौड़ आतंकवादी बम हमले में, जिसमें पांच बच्चों सहित सात लोगों की जान चली गयी थी, सिखों और पीड़ितों को अभीतक न्याय क्यों नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि बरगाड़ी बेअदबी मामले में, मुख्य आरोपियों में से एक प्रदीप कलेर, जिसे पहले गिरफ्तार किया गया था, ने अदालत में साफ तौर पर कहा है कि बेअदबी गुरमीत राम रहीम और उसकी अनुयायी हनीप्रीत के निर्देश पर की गई थी। उन्होंने कहा कि मौड़ बम धमाका मामला भी गुरमीत राम रहीम के डेरा से जुड़ा हुआ है।
जत्थेदार गड़गज्ज ने सरकार से पूछा कि उसने अभी तक गुरमीत राम रहीम, हनीप्रीत और अन्य आरोपियों को इन मामलों में गिरफ्तार करके पंजाब क्यों नहीं लायी है। उन्होंने कहा कि बरगाड़ी मामले में, गुरमीत राम रहीम ने सिखों के खिलाफ एक बड़ी साजिश के तहत बेअदबी करवाई थी, फिर भी मौजूदा आम आदमी पार्टी सरकार ने न केवल बरगाड़ी बेअदबी मुद्दे का इस्तेमाल पूरी तरह से राजनीतिक उद्देश्यों के लिए किया है, बल्कि राम रहीम जैसे सिख विरोधी बाबा की रक्षा करने वाली पार्टी के तौर पर भी काम कर रही है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी के नेताओं ने बार-बार दावा किया है कि मौड़ धमाका उन्हें सत्ता में आने से रोकने के लिए किया गया था, लेकिन सवाल उठाया कि सत्ता में आने के बाद भी इस मामले में कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गयी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार मामूली मुद्दों पर युवाओं के खिलाफ आसानी से मामले दर्ज कर लेती है, जैसे कि एयर राइफल के साथ तस्वीरें पोस्ट करना, जबकि लंबे समय से वह एनएसए और यूएपीए जैसे कानूनों के तहत सिख युवाओं के खिलाफ कार्रवाई करके अपनी सिख विरोधी मानसिकता दिखा रही है।
जत्थेदार गड़गज्ज ने कहा कि बरगाड़ी बेअदबी से जुड़े मामलों को पंजाब से बाहर ट्रांसफर करने की प्रक्रिया के दौरान भी राज्य सरकार ने ट्रांसफर के खिलाफ कोर्ट में कोई अपील दायर नहीं की। इसके बजाय, उच्चतम न्यायालय के वकील हरविंदर सिंह फूलका इन मामलों के ट्रांसफर का विरोध करने वाले याचिकाकर्ताओं की ओर से उच्चतम न्यायालय में मुकदमा लड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के इन मामलों को ट्रांसफर करने के फैसले को भी चुनौती नहीं दी, जिसमें यह टिप्पणी की गयी थी कि पंजाब का माहौल अनुकूल नहीं है। उन्होंने कहा कि यह सरकार की छिपी हुई सिख विरोधी मंशा और डेरा सिरसा के राम रहीम के प्रति उसके झुकाव को दिखाता है।
उन्होंने कहा कि सरकार असली बेअदबी के मामलों में सिखों को न्याय दिलाने में पूरी तरह असफल हो गयी है, और सरकारी नेता बेअदबी पर राजनीति कर रहे हैं और सिखों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।
जत्थेदार ने यह भी कहा कि पंजाब विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां ने तीन साल पहले बरगाड़ी बेअदबी मामले को लेकर सिख संगत के मोर्चे (विरोध प्रदर्शन) का दौरा किया था और तीन महीने का समय मांगकर न्याय का वादा किया था, लेकिन अभी तक न्याय नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि यह मामला श्री अकाल तख्त साहिब के संज्ञान में है, और सभी तथ्य इकट्ठा करने के बाद, श्री संधवां को भी स्पष्टीकरण के लिए बुलाया जा सकता है।
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