श्रीगंगानगर , अप्रैल 07 -- राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले में पिछले कई दिनों से चल रहे बारिश के सिलसिले में मंगलवार को फिर से कुछ इलाकों में हल्की-मध्यम बारिश के साथ ओले गिरे। इससे गेहूं और सरसों की फसलों को काफी नुकसान पहुंचा है।

आज सुबह श्रीगंगानगर शहर व आसपास के क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश हुई। दोपहर को कुछ देर के लिए मौसम साफ होने के बाद दोबारा बादल छा गए और बारिश शुरू हो गई। इस दौरान सादुलशहर तहसील के गांव हाकमाबाद और आसपास के इलाकों में बारिश के साथ जमकर ओले गिरे। किसानों की खड़ी गेहूं की फसल पूरी तरह चौपट हो गई, जबकि सरसों की फसल कटाई के बाद खेतों में रखी हुई थी, जिसे बारिश और ओलावृष्टि से भारी क्षति पहुंची।

अखिल भारतीय किसान सभा के जिला उपाध्यक्ष कौरसिंह सिधू और किसान रमेश ढुकिया ने राज्य सरकार तथा जिला प्रशासन से तुरंत प्रभावित क्षेत्रों का विशेष सर्वेक्षण करवाकर नुकसान झेल रहे किसानों को उचित सहायता राशि उपलब्ध कराने की मांग की है।

उन्होंने बताया कि अभी तक कोई जिम्मेदार अधिकारी, कर्मचारी या फसल बीमा से जुड़ा व्यक्ति प्रभावित इलाकों में नहीं पहुंचा है। उन्होंने कहा कि बार-बार हो रही बारिश से खेतों में खड़ी फसलों के अलावा मंडियों में बिक्री के लिए लाई गई फसल भी बरसाती पानी से भीगकर खराब हो रही है।

श्रीगंगानगर में तीन दिन पहले किसानों ने कृषि उपज मंडी समिति पर भी नाराजगी जताई।

उन्होंने आरोप लगाया कि मंडी में बनाए गए शेड पर व्यापारियों का कब्जा है। व्यापारी माल खरीदने के बाद कई दिनों तक अपना सामान शेड के नीचे रखते हैं और बाद में शिफ्ट करते हैं, जबकि ये शेड किसानों की सुविधा के लिए बनाए गए हैं।किसानों ने बताया कि पिछले हफ्ते ही मंडी समिति अधिकारियों के साथ हुई बैठक में इस समस्या को उठाया गया था और व्यापारियों से माल जल्दी उठाने की मांग की गई थी, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस मुद्दे पर किसानों और उनके प्रतिनिधियों में काफी आक्रोश है।

उल्लेखनीय है कि दो दिन पहले श्रीगंगानगर जिले के सूरतगढ़ उपखंड क्षेत्र तथा लगते हनुमानगढ़ जिले के पल्लू इलाके और बीकानेर जिले के लूणकरणसर तहसील क्षेत्र में भी भारी ओलावृष्टि हुई थी, जिससे किसानों को बड़ा नुकसान हुआ था। उन क्षेत्रों में भी प्रभावित किसानों को मुआवजा दिए जाने की मांग जोर पकड़ रही है।किसान संगठनों ने राज्य सरकार से अपील की है कि पूरे प्रभावित क्षेत्र का शीघ्र सर्वे कर किसानों को तुरंत राहत पहुंचाई जाए ताकि वे आर्थिक संकट से उबर सकें।

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