श्रीगंगानगर , जनवरी 08 -- राजस्थान में श्रीगंगानगर जिले में भारत-पाकिस्तान सीमा के निकट लालगढ़ जाटान गांव के पास प्रस्तावित अग्रिम समेकित विमानन अड्डा (एफसीएबी) के लिए करीब 132 हेक्टेयर जमीन के अधिग्रहण का स्थानीय किसानों ने विरोध शुरू किया है।

किसानों का कहना है कि यह अधिग्रहण उनकी आजीविका पर गंभीर असर डालेगा और वे उचित मुआवजे और पुनर्वास की मांग कर रहे हैं। गुरुवार को किसान जिला कलेक्ट्रेट पहुंचे प्रभावित किसानों ने प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और रक्षा मंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें बाजार मूल्य का चार गुना मुआवजा, पुनर्वास सुविधाएं और अधिगृहीत भूमि पर मौजूद पेड़-पौधों, मकानों और अन्य संपत्तियों के लिए अलग से भुगतान करने की मांग की गई।

उल्लेखनीय है कि 24 दिसम्बर को जोधपुर उच्च न्यायालय ने इस परियोजना को वैध ठहराते हुए 58 किसानों की याचिका को खारिज कर दिया था। उच्च न्यायालय के न्यायाधीश डॉ. नूपुर भाटी की एकल पीठ ने फैसला सुनाते हुए था कहा कि भूमि अधिग्रहण राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में है और प्रक्रिया में कोई अनियमितता नहीं पाई गई। इस फैसले से एयर बेस निर्माण का रास्ता साफ हो गया, जो पाकिस्तान के तीन प्रमुख एयर बेसों तक भारतीय वायुसेना की पहुंच को मजबूत करेगा।

एयर बेस लालगढ़ जाटान क्षेत्र में बनाया जाना प्रस्तावित है, जो सीमा से महज 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। केन्द्र सरकार द्वारा सादुलशहर तहसील में यह परियोजना राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए शुरू की गई है, जिसके तहत करीब 162 किसान प्रभावित हो रहे हैं।

अधिग्रहण का विरोध जताने वालों में अखिल भारतीय किसान सभा के महासचिव गुरचरणसिंह मोड़ के रविंद्र तरखान, महेंद्र वर्मा, सुभाष सहारण, भूपसिंह, मुखराम गोदारा, उत्तमचंद, कौरसिंह, सुरेंद्र कुमार, मैनपाल, संदीपकुमार, पृथ्वीराज शर्मा और सोहन महिया जैसे प्रमुख किसान नेता शामिल रहे। उन्होंने जिला प्रशासन के अधिकारियों को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि अधिग्रहण से उनकी उपजाऊ जमीन छिन जाएगी, जो उनकी पीढ़ियों की कमाई का स्रोत है।

किसानों ने आरोप लगाया कि सरकार ने मुआवजे की दरें तय करते समय स्थानीय बाजार मूल्य को नजरअंदाज किया है। प्रभावित किसान चार गुना अधिक मुआवजे की मांग कर रहे हैं। साथ ही पुनर्वास के तहत नई जमीन आवंटन, आवास सुविधा और प्रभावित परिवारों के लिए रोजगार के अवसर शामिल करने की मांग की गई। अधिगृहीत क्षेत्र में मौजूद पेड़-पौधे, कुएं, मकान और अन्य संरचनाओं के लिए अलग से मुआवजा देने की भी मांग की गई।

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