रायसेन , नवम्बर 13 -- मध्यप्रदेश के रायसेन जिले से करीब 120 किलोमीटर दूर स्थित ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल जामगढ़ की पहचान अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित होने जा रही है। भगवान श्रीकृष्ण की ससुराल के रूप में आधिकारिक मान्यता प्राप्त जामवंत गुफा, जो जामगढ़ के निकट स्थित है, श्रीकृष्ण पाथेय का महत्वपूर्ण पड़ाव मानी जाती है।

जामगढ़ में खजुराहो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के लिए एक शॉर्ट फिल्म की शूटिंग की जा रही है, जिससे इस पौराणिक स्थल को विश्व पटल पर नई पहचान मिलेगी। फेस्टिवल के प्रभारी और फिल्म के निर्देशक सुनील सोन्हिया ने बताया कि 16 से 22 दिसंबर 2025 तक खजुराहो में आयोजित होने वाले "खजुराहो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल" में यह फिल्म प्रदर्शित की जाएगी। इस फेस्टिवल में देश-विदेश से कलाकार, फिल्म निर्माता, निर्देशक और मीडिया प्रतिनिधि भाग लेंगे।

धर्मग्रंथों के अनुसार, यहीं स्यमंतक मणि को लेकर भगवान श्रीकृष्ण और जामवंत के बीच 27 दिन तक युद्ध हुआ था। पराजय के बाद जामवंत ने श्रीकृष्ण को उनके भगवद स्वरूप में पहचाना और उन्हें स्यमंतक मणि के साथ अपनी पुत्री जामवंती का भी वरदान दिया। तभी से यह स्थान श्रीकृष्ण की ससुराल के रूप में प्रसिद्ध है।

हाल ही में अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव के अवसर पर प्रदेश के मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने मंच से घोषणा की थी कि श्रीकृष्ण की ससुराल जामगढ़ को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई जाएगी।

जामगढ़ निवासी पुरातत्व इतिहासकार सत्यनारायण याज्ञवल्क्य ने बताया कि यहां के निकट स्थित विंध्याचल की पहाड़ी पर बनी प्राकृतिक शिव गुफा का भी विशेष धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व है। इस गुफा में स्थित प्राकृतिक शिवलिंग पर सूर्य की पहली किरण सीधे पड़ती है। देश-विदेश से श्रद्धालु यहां बड़ी संख्या में दर्शन हेतु पहुँचते हैं।

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