हैदराबाद , दिसंबर 06 -- बीआरएस कार्यकारी अध्यक्ष के टी रामाराव ने शनिवार को केंद्र सरकार की प्रस्तावित चार श्रम संहिताओं और हालिया आर्थिक नीतियों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने चेतावनी दी कि ये संहिताएं श्रमिक अधिकारों के लिए गंभीर खतरा हैं और कई क्षेत्रों में संकट पैदा कर सकती हैं।

श्री रामाराव ने तेलंगाना भवन में ट्रेड यूनियनों के गोलमेज सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि यहां हुई चर्चा संसद और विधानसभा में होने वाली बहसों से कहीं अधिक सार्थक थी। उन्होंने सबसे पहले डॉ. बी आर अंबेडकर को उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि दी और उन्हें संविधान का शिल्पी बताया, जिसने तेलंगाना राज्य के गठन को संभव बनाया।

श्री रामाराव ने कहा कि भारत आज भी विरोधाभासों का देश है-जहां दुनिया के कुछ सबसे अमीर लोग रहते हैं, वहीं सबसे गरीब लोग भी यहीं हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिका-यूरोप के लिए बनी नीतियों और कानूनों को "वैश्विक एकरूपता" के नाम पर भारत में सीधे लागू नहीं किया जा सकता।

उन्होंने कहा, "इस देश की 92 प्रतिशत आबादी के पास आज भी सफेद राशन कार्ड है।" यह बात देश में गरीबी के स्तर को दर्शाती है।

पूर्व मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव की गरीब-हितैषी नीतियों का बचाव करते हुए श्री रामाराव ने याद दिलाया कि उन्होंने सिरसिल्ला के बुनकरों के लिए 10 साल में 3,500 करोड़ रुपये की बथुकम्मा साड़ियां बनवाईं। उन्होंने कहा कि कुछ आलोचक बिना तथ्यों को समझे बोलते हैं। श्री राव ने मुख्यमंत्री बनने से पहले भी, जब विपक्ष में थे, आत्महत्या करने वाले बुनकरों के परिवारों को खुद आर्थिक मदद दी थी।

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