नयी दिल्ली , फरवरी 06 -- श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा है कि श्रमिकों की समृद्धि से देश की प्रगति होती है इसलिए श्रमिकों का कल्याण, सम्मान और सुरक्षा राष्ट्रीय विकास के प्रति सरकार की दृष्टि का केंद्र बिंदु है।

डॉ मांडविया ने सोशल मीडिया एक्स पर इस बारे में एक पोस्ट में शुक्रवार को कहा कि ओडिशा के पुरी में भारतीय मजदूर संघ के 21वें त्रेवार्षिक सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित किया। उनका कहना था कि श्रम राष्ट्र निर्माण का आधार है और श्रमिकों का सम्मान विकसित भारत की दिशा तय करता है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वे इस संकल्प को साकार करने में अपना सहयोग दे रहे हैं। उनका कहना था कि न केवल देश का सबसे बड़ी ट्रेड यूनियन है, बल्कि विश्व के सबसे बड़े संगठनों में से एक है और इसने श्रमिकों के कल्याण के लिए काम करने, देश के कार्यबल के लिए न्याय सुनिश्चित करने और उन्हें राष्ट्रीय विकास और आर्थिक विकास में भागीदार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

उन्होंने कहा "मुझे श्रम शक्ति और युवा शक्ति के लिए काम करने का सौभाग्य मिला है। ये दोनों शक्तियाँ भारत की प्रगति की नींव हैं और विकसित भारत के सपने को साकार करने में निर्णायक भूमिका निभाएंगी। मैं श्रम संहिता का स्वागत करने, श्रमिकों में जागरूकता फैलाने और 15 अन्य केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के साथ मिलकर गलत सूचनाओं का मुकाबला करने के लिए भारतीय मजदूर संघ को बधाई देता हूं। यह जिम्मेदार और रचनात्मक नेतृत्व को दर्शाता है, जो श्रमिकों के हितों को संगठनात्मक हितों से ऊपर रखता है।"डॉ. मांडविया ने कहा कि भारतीय मजदूर संघ ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) और कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) की वेतन सीमा बढ़ाने, न्यूनतम वेतन पर निर्णय लेने और ईपीएस-95 के तहत न्यूनतम पेंशन बढ़ाने के संबंध में ज्ञापन प्रस्तुत किए हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि इन मामलों की सावधानीपूर्वक जांच की जाएगी और आने वाले दिनों में श्रमिकों के हित में निर्णय लिए जाएंगे।

उन्होंने कहा कि देश की प्रगति श्रमिकों के कल्याण से अलग नहीं है। जब श्रमिक समृद्ध होते हैं, तभी देश प्रगति करता है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित