सिडनी , फरवरी 25 -- ऑस्ट्रेलिया के शोधकर्ताओं ने मूंगफली के फेंके गए छिलकों को ग्राफीन में बदलने का एक तरीका विकसित किया है। ग्राफीन इलेक्ट्रॉनिक्स और ऊर्जा उपकरणों के लिए एक मूल्यवान घटक है।

ऑस्ट्रेलिया के यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू साउथ वेल्स (यूएनएसडब्ल्यू) द्वारा बुधवार को जारी एक बयान में कहा गया है कि इस विकास से सस्ते इलेक्ट्रॉनिक्स और उर्जा भंडारण के लिए नये रास्ते खुलेंगे। मूंगफली के छिलकों से बना ग्राफीन बैटरी, सौर पैनल, टच स्क्रीन, लचीले इलेक्ट्रॉनिक्स और सुपर-फास्ट ट्रांजिस्टर के लिए उपयोग किया जा सकेगा।

शोध दल ने पाया कि लिग्निन की उपस्थिति के कारण मूंगफली के छिलकों को उच्च तापमान पर ग्राफीन में बदला जा सकता है। उल्लेखनीय है कि लिग्निन पौधों में प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला पॉलिमर है, जिसमें प्रचुर मात्रा में कार्बन पाया जाता है।

केमिकल इंजीनियरिंग जर्नल एडवांस में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, इस दो चरणों वाली विधि में छिलकों को लगभग 500 डिग्री सेल्सियस तक गर्म किया जाता है, फिर मिलीसेकंड के लिए लगभग 3,000 डिग्री पर उन्हें गर्म किया जाता है, जो रसायनों के बिना कार्बन परमाणुओं को एक परत वाले (सिंगल-लेयर ग्राफीन) में पुनर्गठित कर देता है।

शोधकर्ताओं ने कहा कि उनकी गणना बताती है कि इस पद्धति का उपयोग करके एक किलोग्राम ग्राफीन का उत्पादन केवल 1.3 अमेरिकी डॉलर की ऊर्जा लागत पर किया जा सकता है, जबकि उत्सर्जन भी काफी घट जाता है और उत्पादन समय घटकर लगभग 10 मिनट रह जाता है।

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