मुंबई , जनवरी 12 -- नामांकन और फीस वृद्धि के कारण चालू वित्त वर्ष में देश के शैक्षणिक संस्थानों की आमदनी चालू वित्त वर्ष में 11 प्रतिशत से 13 प्रतिशत के बीच बढ़ने की संभावना है।
बाजार अध्ययन एवं साख निर्धारक एजेंसी क्रिसिल की सोमवार को जारी रिपोर्ट में यह बात कही गयी है। इसमें कहा गया है कि आय बढ़ने के बावजूद कंपनियों का परिचालन लाभ 27-28 प्रतिशत पर स्थिर रहेगा। इसके पीछे नये कर्मचारियों की नियुक्ति, उनके वेतन और अन्य मदों में संबंधित खर्च को मुख्य कारण बताया गया है।
क्रिसिल का तर्क है कि लोगों के पास अब खर्च योग्य आय पहले से अधिक है और वे बच्चों की शिक्षा पर ज्यादा खर्च कर रहे हैं। यह लगातार पांचवां साल होगा जब शैक्षणिक संस्थानों की आमदनी की वृद्धि दर दहाई अंक में रहेगी। वहीं, ज्यादा छात्रों के लिए संस्थानों को अपनी क्षमता में भी विस्तार करना होगा।
एजेंसी ने किंडर गार्टन से 12वीं तक (के-12) और उच्च शिक्षा के कुल 107 संस्थानों की वित्तीय स्थितियों के आंकलन के आधार पर यह रिपोर्ट तैयार की है। इन संस्थानों की सम्मिलित सालाना आय 26 हजार करोड़ रुपये है। इसमें के-12 संस्थानों की आय में नौ से दस प्रतिशत तक वृद्धि की उम्मीद है।
क्रिसिल रेटिंग्स के निदेशक हिमांक शर्मा ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों की तुलना में कुल आय में दहाई अंकों की स्वस्थ वृद्धि अपेक्षित है। इसमें मुख्य योगदान फीस में बढ़ोतरी का है। इसके साथ ही नामांकन बढ़ने का असर भी होगा, हालांकि इसकी रफ्तार कम रहेगी। इसके बावजूद कर्मचारियों के वेतन और अन्य सुविधाओं पर खर्च के कारण परिचालन लाभ में सुधार नहीं दिखेगा।
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