बारां , अप्रैल 21 -- राजस्थान के बारां जिले स्थित शेरगढ़ वन्यजीव अभयारण्य में चीता 'केपी-3' के आगमन ने वन्यजीव संरक्षण और पारिस्थितिक गलियारे को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

कूनो राष्ट्रीय उद्यान से निकलकर पहुंचे इस चीते को लेकर स्थानीय संगठनों और पर्यावरणविदों ने इसे ऐतिहासिक बताया है। शाहबाद घाटी संरक्षण संघर्ष समिति ने इस मौके पर राजस्थान सरकार से मांग की है कि चीते को वापस कूनो भेजने के बजाय शेरगढ़ अभयारण्य में ही स्थायी आवास दिया जाए। समिति का कहना है कि यह इस बात का प्रमाण है कि कूनो से शेरगढ़ तक एक सक्रिय और प्राकृतिक वन्यजीव गलियारा मौजूद है।

समिति के संरक्षक एडवोकेट प्रशांत पाटनी, बृजेश विजयवर्गीय, विष्णु साबू, जितेंद्र शर्मा समेत अन्य सदस्यों ने वन एवं पर्यावरण विभाग को भेजे ज्ञापन में बताया कि यह गलियारा न केवल कूनो को शाहाबाद, शेरगढ़ से जोड़ता है, बल्कि मुकुंदरा हिल्स बाघ अभयारण्य तक विस्तारित है। इससे भविष्य में चीता सहित अन्य वन्यजीवों के लिए एक व्यापक और सुरक्षित आवासीय क्षेत्र विकसित किया जा सकता है।

विशेषज्ञों और स्थानीय प्रतिनिधियों ने चेताया है कि चीते को ट्रैंक्विलाइज़ करके वापस भेजना एक अप्राकृतिक कदम होगा। उनका तर्क है कि कोई वन्यजीव स्वयं किसी क्षेत्र में आता है, तो यह उस क्षेत्र की अनुकूलता को दर्शाता है। ऐसे में संरक्षण की रणनीति को प्राकृतिक व्यवहार के अनुरूप ही होना चाहिए।

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