मुंबई , मार्च 17 -- पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण भारतीय शेयर बाजारों में जारी अस्थिरता आगे भी बनी रह सकती है।
प्रभुदास लीलाधर की वेल्थ मैनेजमेंट इकाई पीएल वेल्थ ने अपनी ताजा रिपोर्ट 'मार्केट आउटलुक - मार्च 2026' में कहा गया है कि आने वाले समय में बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है, क्योंकि निवेशक लगातार भू-राजनीतिक घटनाओं और कॅमोडिटी की कीमतों पर नजर बनाये हुए हैं। हालांकि, भारत का व्यापक आर्थिक माहौल काफी मजबूत है, जो लंबी अवधि के लिए भारतीय इक्विटी बाजार के आकर्षण को और मजबूत करता है।
पीएल वेल्थ मैनेजमेंट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी इंदरबीर सिंह जॉली ने कहा कि बाजार में अस्थिरता आना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है, खासकर तब जब वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक जोखिम बढ़ जाते हैं। हालांकि, देश के आर्थिक बुनियादी ढांचे मजबूत हैं।
उन्होंने कहा, "जारी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं, स्थिर खपत और कंपनियों की मजबूत बैलेंस शीट से लंबी अवधि के विकास के लिए एक ठोस आधार तैयार है। ऐसे दौर अक्सर निवेशकों को अच्छी गुणवत्ता वाली कंपनियों में सही दाम (उचित वैल्यूएशन) पर निवेश का मौका देते हैं।"रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच कच्चे तेल में तेजी से महंगाई बढ़ने और वैश्विक विकास में सुस्ती की चिंताएं पैदा हो गयी है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर काफी निर्भर है, इसलिए तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से महंगाई और रुपये की विनिमय दर प्रभावित हो सकती है।
पीएल वेल्थ का कहना है कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद देश का घरेलू आर्थिक माहौल काफी अनुकूल बना हुआ है। बुनियादी ढांचे पर सरकार द्वारा किया जा रहा खर्च विकास का मुख्य इंजन रहा है, जिसने इंजीनियरिंग, निर्माण और पूंजीगत वस्तुओं जैसे क्षेत्रों में निवेश को गति दी है। शहरी और ग्रामीण दोनों बाजारों में खपत स्थिर बनी हुई है। देश के बैंकिंग सेक्टर में भी बड़ा बदलाव देखा गया है। परिसंपत्ति की गुणवत्ता में सुधार और कर्ज की स्थिर मांग ने व्यापक निवेश चक्र को मजबूती दी है।
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