मुंबई , नवंबर 07 -- वैश्विक बाजार की अनिश्चितताओं और विदेशी संस्थागत निवेशकों के बीच शुक्रवार को शेयर बाजारों मेंं उतार-चढ़ाव भरे कारोबार के साथ स्थानीय शेयर में नरमी का सिलिसला बना रहा और बीएसई-30 सेंसेक्स और निफ्टी-50 हल्की गिरावट के साथ बंद हुए।
वाहन , वित्तीय सेवा और बैंकिंग क्षेत्र के शेयरों ने बाजार को बड़ी गिरावट से बचा लिया। प्रमुख सूचकांकों में गुरुवार को भी गिरावट दर्ज की गयी थी।
बीएसई सेंसेक्स सूचकांस 83,311.01 के पिछले बंद की तुलना में आज सुबह तेजी से गिरावट के साथ 83,150.15 पर खुला और नीचे में 82,670.95 तक गिरने के बाद अपराह्न के कारोबार में काफी हद तक संभल गया और कारोबार के अंत में 83,216.28 पर बंद हुआ। यह कल की तुलना में 94.73 अंक यानी 0.11 प्रतिशत की गिरावट दर्शाता है।
इसी तरह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (निफ्टी) का 50 प्रमुख शेयरों वाला सूचकांक निफ्टी50 भी उतार चढाव भरे कारोबार में 17.40 अंक यानी 0.07 प्रतिशत की गिरावट के साथ 25,492.30 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान यह 25,433.80 पर तेजी से गिरावट के साथ खुल कर 25,318.45 तक नीचे चला गया था। अपराह्न के सत्र में यह एक बार 25,551.25 के स्तर तक चढ़ गया था।
बीएसई में आज लाभ और हानि में रहे शेयरों की संख्या बराबर रही और बैंकिंग तथा प्रौद्योगिकी शेयरों में मिलाजुला रुख दिखा । लाभ में रहे 15 शेयरों में बजाज फाइनेंस, टाटा स्टील, महिंद्र एंड महिंद्रा, बजाज फिनसर्व, आईसीआईसीआई बैंक, अडानी पोर्ट्स, बीईएल , इन्फोसिस, एशियन पेंट्स , पावर ग्रिड, कोटक बैंक , सन फार्मा, मारुति, एटर्नल और एलएंडटी शामिल हैं।
निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज इंडेक्स 0.76 प्रतिशत सुधर कर 27,238.75, निफ्टी बैंक 0.56 प्रतिशत सुधर कर 57,876.80 और व्यापक आधार वाला निफ्टी-100, 0.04 प्रतिशत की हल्की गिरावट के साथ 26144.20 पर बंद हुआ। निफ्टी मिडकैप 100 में 0.63 प्रतिशत और निफ्टी ऑटो में 0.57 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गयी।
ब्रोकरेज फर्म जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के अनुसंधान प्रमुख विनोद नायर ने कहा, " घरेलू शेयर बाज़ार शुरुआती गिरावट से उबर गए क्योंकि शुरुआती गिरावट के बाद कारोबार के दौरान विभिन्न स्तरों पर खरीदारी बढ़ गयी थी।" श्री नायर की राय में कंपनियों के मिश्रित तिमाही नतीजों, सतर्क वैश्विक संकेतों और लगातार विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की निकासी के बीच इसे रुझान में बदलाव कहना अभी जल्दबाजी होगी।
उन्होंने कहा कि कंपनियों के दूसरी तिमाही के नतीजों से चुनिंदा क्षेत्रों को समर्थन मिला है, जिसमें व्यापक सूचकांकों ने बेहतर प्रदर्शन किया। इसकी वजह से वित्तीय क्षेत्र के शेयरों, खासकर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में तेज उछाल रही। बैंकिंग क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) सीमा में वृद्धि और विलय की अटकलों से इस क्षेत्र में निवेशकों रुचि बढ़ रही है।
विश्लेषकों के अनुसार बाजार की मौजूदा गति की स्थिरता अमेरिका में आर्थिक मंदी के जोखिम और अमेरिका-भारत व्यापार वार्ता के नतीजों तथा अमेरिका-चीन व्यापार समझौतों पर निर्भर करेगी।
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