नयी दिल्ली , दिसंबर 04 -- दुनिया को उर्दू से जोड़ने वाला और युवा पीढ़ी को इस भाषा की खूबसूरती से रूबरू कराने वाला सालाना साहित्यिक पर्व 'जश्न-ए-रेख़्ता' दिल्ली के बांसेरा पार्क में पांच से सात दिसंबर के बीच साहित्य प्रेमियों का स्वागत करेगा।
दुनियाभर में उर्दू भाषा, साहित्य और भारतीय संस्कृति के सबसे बड़े आयोजन के रूप में देखा जाने वाला जश्न-ए-रेख़्ता इस बार ज़्यादा रंगों, विविध कलात्मक स्वरूपों और अनगिनत आकर्षणों के साथ आ रहा है।
अपने 10वें आयोजन में यह तीन-दिवसीय पर्व एक बार फिर देश-दुनिया के प्रसिद्ध कवियों, लेखकों, संगीतकारों और सांस्कृतिक हस्तियों को एक मंच पर लेकर आयेगा। उर्दू प्रेमी एक बार फिर संगीत, थिएटर, दास्तानगोई और शायरी जैसी पारंपरिक विधाओं का लुत्फ उठा पायेंगे।
जश्न-ए-रेख़्ता में इस बार चार मंचों पर होने वाले 35 सत्रों में 300 से ज़्यादा कलाकार अपनी कला प्रस्तुत करेंगे। इसके आयोजन में गुलज़ार, दिव्या दत्ता, सुखविंदर सिंह, सलीम-सुलेमान, जावेद अख़्तर, शंकर महादेवन और प्रतिभा सिंह भगेल जैसी हस्तियां शिरकत करेंगी।
'दिल अभी भरा नहीं' नाम के सत्र में जावेद अख़्तर, शंकर महादेवन और प्रतिभा सिंह भगेल दिवंगत शायर और गीतकार साहिर लुधियानवी को खि़राज-ए-अक़ीदत पेश करेंगे। इसी तरह 'रंग और नूर : उर्दू शायरों के फिल्मी शाहकार' नाम की संगीतमय प्रस्तुति में हुमा ख़लील भारतीय सिनेमा में उर्दू कवियों की भूमिका को याद करेंगी।
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