नयी दिल्ली , जनवरी 04 -- भारत को 'दुनिया का अन्नदाता' बनाने के संकल्प के साथ केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रविवार को 25 फसलों की 184 नयर उन्नत और जलवायु-सहनशील किस्में राष्ट्र को समर्पित कीं।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के यहां आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में श्री चौहान ने कहा कि ये नई किस्में न केवल किसानों की आय बढ़ाएंगी, बल्कि बदलते मौसम और जलवायु संकट के खिलाफ 'सुरक्षा कवच' का काम करेंगी।
केंद्रीय मंत्री ने आंकड़ों के जरिए बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीज अनुसंधान की गति में भारी उछाल आया है। उन्होंने कहा, "1969 से 2014 तक यानी करीब 45 वर्षों में 3969 प्रजातियां अधिसूचित की गई , जबकि पिछले महज 11-12 वर्षों में ही 3236 उच्च उत्पादक किस्मों को मंजूरी दी गई है।" उन्होंने इस सफलता का श्रेय वैज्ञानिकों, कृषि विश्वविद्यालयों और निजी क्षेत्र के सामूहिक प्रयासों को दिया।
एक बड़ी उपलब्धि का जिक्र करते हुए श्री चौहान ने कहा कि भारत अब धान की पैदावार के मामले में चीन को पीछे छोड़कर वैश्विक शिखर पर पहुंच गया है। भारत ने 1501.8 लाख टन की रिकॉर्ड पैदावार के साथ नया कीर्तिमान स्थापित किया है। उन्होंने इसे 'विकसित भारत' के निर्माण की आधारशिला बताया।
कार्यक्रम के दौरान जारी की गई 184 किस्मों में अनाज की 122 किस्में हैं। इनमें धान की 60 और मक्का की 50 किस्मों के साथ ज्वार, बाजरा और रागी शामिल हैं। नकदी फसलें में कपास की 24 किस्में (22 बीटी कपास सहित) और गन्ने की 6 नई किस्में हैं जबकि तिलहन एवं दलहन संवर्ग में तिलहन की 13 और दलहन (अरहर, मूंग, उड़द) की 6 किस्में हैं। इसके अलावा 11 चारा फसलें, जूट और तंबाकू की एक-एक नई किस्म शामिल हैं।
श्री चौहान ने बताया कि इन 184 किस्मों के विकास में आईसीएआर संस्थानों का योगदान 60, कृषि विश्वविद्यालयों का 62 और निजी बीज कंपनियों का योगदान 62 किस्मों का रहा है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित