अगरतला , फरवरी 11 -- केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को त्रिपुरा में 546.79 करोड़ रुपये की लागत वाले 179 ग्रामीण विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया।

श्री चौहान ने राज्य के पहले विशेष सम्मेलन का भी उद्घाटन किया, जिसमें स्थानीय पंचायतों से लेकर संसद तक के जनप्रतिनिधि शामिल हुए। इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य नए 'विकसित भारत- जीरामजी कानून को प्रभावी ढंग से लागू करने पर चर्चा करना और जनप्रतिनिधियों को उनकी नई भूमिका के प्रति जागरूक करना था।

कृषि मंत्री ने स्पष्ट किया कि नया कानून 'मनरेगा' के स्थान आया है और इसे पिछले कानून के कार्यान्वयन के दौरान पहचानी गई कमियों को दूर करने के लिए तैयार किया गया है। उन्होंने घोषणा की कि नया कानून अब ग्रामीण क्षेत्रों में 125 दिनों के सुनिश्चित रोजगार की गारंटी देता है, जो मनरेगा के तहत मिलने वाले 100 दिनों से अधिक है। यह बदलाव ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिरता को मजबूत करने और स्थानीय शासन को अधिक अधिकार देने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

केंद्रीय मंत्री ने 2026-27 के केंद्रीय बजट को 'ऐतिहासिक' और 'दूरदर्शी' बताते हुए कहा कि पूर्वोत्तर भारत अब देश के विकास के इंजन के रूप में कार्य कर रहा है। उन्होंने जानकारी दी कि इस वर्ष ग्रामीण विकास मंत्रालय के बजट में 21 प्रतिशत की भारी वृद्धि की गई है। यह बजट विशेष रूप से गांवों, पिछड़े समूहों, किसानों, युवाओं और महिलाओं की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया गया है, ताकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2047 तक 'विकसित भारत' बनाने के नजरिए को तेज किया जा सके।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का लक्ष्य 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालना है और नया कानून इसी नजरिए का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में संचालित कार्यक्रमों के कारण देश में गरीबी का स्तर लगातार कम हो रहा है और यह बजट जरूरतमंदों को सशक्त बनाने के लिए एक प्रभावी फ्रेमवर्क तैयार करता है। इस सम्मेलन के जरिए स्थानीय शासन को मजबूत करने और विकास कार्यों के प्रभाव को बढ़ाने के लिए एक समन्वित रणनीति बनाने पर भी जोर दिया गया।

इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा और राज्य कैबिनेट के सदस्य भी उपस्थित रहे।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित