चेन्नई , मार्च 14 -- मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ ने तमिलनाडु के शिवगंगा जिले के मणामदुरै में 26 वर्षीय आर. आकाश डेलिसन की कथित हिरासत में मौत के मामले में दायर याचिका पर सुनवाई पूरी कर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने न्यायमूर्ति एल. विक्टोरिया गौरी को बताया कि प्राथमिकी में भारतीय न्याय संहिता की धारा 103 और एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम की धाराएं जोड़ दी गई हैं।

इससे पहले अदालत ने डॉक्टरों की टीम से वीडियो रिकॉर्डिंग के साथ पोस्टमार्टम कराने,सीबी-सीआईडी जांच सुनिश्चित करने और मदुरै-रामेश्वरम राजमार्ग को जाम कर रहे प्रदर्शनकारियों को शांतिपूर्वक हटाने के निर्देश दिए थे।

यह याचिका मृतक के पिता राजेश कन्नन ने दायर की थी, जिसमें तमिलनाडु सरकार को इस मामले में हत्या का आपराधिक मामला दर्ज करने का निर्देश देने की मांग की गई है। याचिका में सही पोस्टमार्टम कराने, सीबी-सीआईडी जांच और मुआवजे की मांग भी शामिल है। याचिकाकर्ता ने यह भी मांग की कि उनके बेटे की मौत के लिए जिम्मेदार सभी पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार किया जाए।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुई अधिवक्ता और सामाजिक कार्यकर्ता हेनरी टिपहाने ने मदुरै के सरकारी राजाजी अस्पताल की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कई विसंगतियां होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट को विशेषज्ञों की राय के लिए भेजा जाना चाहिए। उनका कहना था कि पोस्टमार्टम तमिलनाडु मेडिकल कोड और एनएचआरसी के दिशा-निर्देशों से अलग तरीके से किया गया और उपलब्ध साक्ष्य गंभीर पुलिस यातना की ओर संकेत करते हैं।

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