अमृतसर , नवंबर 03 -- शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की सोमवार को हुई आम बैठक के दौरान कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को सदस्यों ने जयकारों के बीच मंजूरी दी।

इन प्रस्तावों में नौवें गुरु गुरु तेग बहादुर साहिब के 350वें शहीदी पर्व के अवसर पर केंद्र सरकार से सिखों के धार्मिक अधिकारों की रक्षा करने की मांग, सिख समुदाय की जायज मांगें और पंजाब से संबंधित मामले, पंजाब में आई बाढ़ पर संवेदना व्यक्त करना और संस्थाओं द्वारा दिये गये योगदान की प्रशंसा करना, गुरुद्वारा श्री दरबार साहिब श्री करतारपुर साहिब के गलियारे को फिर से खोलना, भाई बलवंत सिंह राजोआना की सजा माफ करना और जेल में बंद सिखों को रिहा करना, ऐतिहासिक स्थलों से जुड़े मुद्दों का समाधान करना और पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ के सिंडिकेट को खत्म करने के फैसले की निंदा करना, साथ ही नवंबर 1984 के सिख कत्लेआम को संसद में नरसंहार घोषित करने की मांग करना शामिल हैं।

श्री गुरु तेग बहादुर साहिब की 350वीं शहीदी जयंती के अवसर पर गुरु साहिब को श्रद्धांजलि देते हुए एक प्रस्ताव पारित किया गया, जिसके माध्यम से देश में सिखों के सामने आने वाली चुनौतियों को दूर करने तथा सिखों के धार्मिक अधिकारों, विशिष्टता और एकांत के सम्मान को सुनिश्चित करने की मांग की गयी।

इसी प्रकार, एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव के माध्यम से भारत की स्वतंत्रता, एकता, सुरक्षा और समृद्धि के लिए सिखों द्वारा दिये गये अद्वितीय योगदान की चर्चा करते हुए, केंद्र सरकार से मांग की गयी कि सिख समुदाय के अधिकारों, हितों और जायज मांगों को नजरअंदाज न किया जाये। प्रस्ताव में कहा गया कि पंजाब की नदियों का पानी, जिस पर पहला अधिकार पंजाब के लोगों का है, अवैध रूप से दूसरे राज्यों में जाने से रोका जाये और सतलुज यमुना लिंक नहर से संबंधित कार्रवाई पर भी रोक लगायी जाये।

प्रस्ताव में कहा गया कि चंडीगढ़, जो पंजाब की धरती पर बनाया गया था और राज्य की राजधानी भी है, को पूरी तरह से पंजाब को सौंप दिया जाये। भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड में पंजाब की भागीदारी बरकरार रखी जाये और मनमाने फैसले थोपने की हरकतों पर रोक लगायी जाये। पंजाब की अर्थव्यवस्था के आधार, कृषि से संबंधित फैसले किसानों और राज्य के परामर्श से लिए जायें और न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी दी जाये। सीमावर्ती राज्य पंजाब को संसाधनों, करों और नीतियों पर पूरा अधिकार दिया जाये। देश में सिखों की विशिष्ट पहचान, इतिहास और विचारधारा के समक्ष उत्पन्न चुनौतियों को देखते हुए, केंद्र सरकार को सभी राज्य सरकारों को सिखों की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करने के निर्देश देने चाहिए। परीक्षाओं के दौरान सिख छात्रों को ककारों (धार्मिक चिन्न) के साथ बैठने से रोकने की दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं पर भी सख्ती से रोक लगायी जानी चाहिए।

एक प्रस्ताव में, हाल ही में आयी बाढ़ के लिए पंजाब सरकार को सीधे तौर पर ज़िम्मेदार ठहराया गया और गहरी चिंता व्यक्त की गयी। प्रस्ताव में कहा गया कि बाढ़ से घरों, खेतों और फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है, जिससे पंजाब की अर्थव्यवस्था कई साल पीछे चली गयी है। प्रस्ताव में पंजाब के लोगों के साथ खड़े होने की प्रतिबद्धता भी व्यक्त की गयी और शिरोमणि कमेटी के राहत कार्यों में शामिल संगठनों, संगतों, शिरोमणि कमेटी के सदस्यों और कर्मचारियों के प्रयासों की सराहना की गयी। प्रस्ताव में बाढ़ के दौरान शिरोमणि अकाली दल द्वारा प्रदान की गयी राहत सेवाओं की भी प्रशंसा की गयी।

इसी तरह, एक अन्य प्रस्ताव में केन्द्र सरकार से गुरुद्वारा श्री दरबार साहिब, श्री करतारपुर साहिब को जोड़ने वाले गलियारे को फिर से खोलने की मांग की गयी, जो कुछ समय से बंद है। प्रस्ताव में सरकार से पासपोर्ट की आवश्यकता को समाप्त करने और प्रक्रिया को सरल बनाने का भी अनुरोध किया गया।

एक प्रस्ताव में केंद्र सरकार से मांग की गयी कि वह श्री गुरु तेग बहादुर साहिब के 350वें शहीदी पर्व को समर्पित करते हुए जेल में बंद सिखों की रिहाई की तुरंत घोषणा करे। प्रस्ताव में जेल में बंद बलवंत सिंह राजोआना को तुरंत रिहा करने के साथ-साथ जगतार सिंह हवारा, गुरदीप सिंह खैरा, दविंदरपाल सिंह भुल्लर, जगतार सिंह तारा और परमजीत सिंह भियोरा, जिन्होंने अपनी कानूनी सजा पूरी कर ली है, की सजा कम करने की मांग की गयी। प्रस्ताव में कहा गया कि यदि जेल में बंद सिखों की रिहाई के संबंध में कोई निर्णय नहीं लिया गया, तो सिख समुदाय अपने सिद्धांतों और परंपराओं के अनुरूप कड़ा निर्णय लेने के लिए मजबूर होगा, जिसके लिए सरकार जिम्मेदार होगी।

एक अन्य प्रस्ताव पारित कर केन्द्र सरकार से सिख समुदाय के ऐतिहासिक स्थलों से जुड़े लंबे समय से लंबित मुद्दों का तुरंत समाधान करने की मांग की गयी। प्रस्ताव में कहा गया कि श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी के 350वें प्रकाश पर्व के अवसर पर, धार्मिक स्वतंत्रता के लिए उनकी शहादत को याद करते हुए, सिख समुदाय के धार्मिक स्थलों से संबंधित लंबे समय से लंबित मुद्दों का सार्थक दृष्टिकोण अपनाकर तुरंत समाधान किया जाना चाहिए। एक प्रस्ताव में पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ के सिंडिकेट और सीनेट को समाप्त करने के केंद्र सरकार के फैसले की कड़ी निंदा की गई। इसमें कहा गया कि सरकार स्पष्ट रूप से पंजाब और राज्य के उच्च शिक्षा संस्थान के अधिकारों को समाप्त करने की कोशिश कर रही है, जो पंजाब के साथ एक और अन्याय है। इस संबंध में, पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार द्वारा पंजाब के अधिकारों का प्रतिनिधित्व करने के लिए ठोस कदम न उठाने पर भी सवाल उठाए गए। प्रस्ताव में यह भी कहा गया कि पंजाब से जुड़े मुद्दे, चाहे वह राजधानी चंडीगढ़ हो, नदियों का पानी हो या भाखड़ा ब्यास प्रबंधन हो, जहां केंद्र सरकार हमेशा पंजाब के खिलाफ रही है और पंजाब सरकार का रवैया भी राज्य के हितों के प्रति ईमानदार नहीं रहा है।

एक अन्य प्रस्ताव पारित किया गया, जिसमें नवंबर 1984 में दिल्ली, कानपुर, बोकारो सहित देश के विभिन्न हिस्सों में हुए सिख जनसंहार की निंदा की गयी और मांग की गयी कि केंद्र सरकार संसद में माफी मांगे और इसे सिख नरसंहार घोषित करे।

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