पटना , दिसंबर 14 -- बिहार विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने रविवार को कहा कि शिक्षक राष्ट्र की आत्मा हैं, और उनके सशक्त होने से समाज और देश सशक्त होगा। डॉ. प्रेम कुमार ने आज बिहार विधान परिषद उपसभागार में आयोजित शिक्षक प्रतिभा सम्मान समारोह कार्यक्रम में कहा कि शिक्षक सम्मान समारोह जैसे पावन एवं प्रेरणादायी अवसर पर शिक्षकों के बीच उपस्थित होना उनके लिए हर्ष और गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि यह समारोह केवल शिक्षकों को सम्मानित करने का कार्यक्रम नहीं, बल्कि उस महान ज्ञान-परंपरा को नमन करने का अवसर है, जिसने भारत को विश्वगुरु की पहचान दिलाई है।

डॉ. कुमार ने कहा कि शिक्षक समाज का वह मजबूत स्तंभ हैं, जिस पर राष्ट्र की नींव टिकी होती है। उन्होंने गुरु महिमा का उल्लेख करते हुए कहा कि "गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः" केवल श्लोक नहीं, बल्कि गुरु के सर्वांगीण योगदान का सजीव उदाहरण है। शिक्षक न केवल पुस्तकीय ज्ञान देते हैं, बल्कि जीवन मूल्य, संस्कार, अनुशासन और चरित्र निर्माण का भी महत्वपूर्ण कार्य करते हैं।उन्होंने कहा कि आज के तकनीकी युग में शिक्षक की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। सूचनाओं की अधिकता के इस दौर में सही और गलत का विवेक बच्चों में विकसित करना शिक्षकों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि शिक्षक ही बच्चों को यह सिखाते हैं कि जीवन में केवल डिग्री नहीं, बल्कि कर्तव्य, नैतिकता और मानवता भी आवश्यक है।

बिहार विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि बिहार की धरती शिक्षा और ज्ञान की प्राचीन एवं गौरवशाली परंपरा से जुड़ी रही है। नालंदा और विक्रमशिला जैसे विश्वविख्यात विश्वविद्यालय इस बात के प्रमाण हैं कि बिहार ने सदैव शिक्षा के क्षेत्र में विश्व का मार्गदर्शन किया है। आज के शिक्षक उसी परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।

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