अलवर , फरवरी 10 -- राजस्थान में अलवर जिले के अकबरपुर थाना क्षेत्र में निर्भयपुरा गांव में एक सरकारी शिक्षक द्वारा आत्महत्या किए जाने के मामले में दो पूर्व और एक वर्तमान प्रधानाचार्य सहित सात कार्मिकों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

निर्भयपुरा गांव में करीब 100 मीटर दूर स्थित अपने घर के बाड़े में सरकारी शिक्षक बड्डन लाल भलाई ने टीन शेड़ में फंदा लगाकर रविवार को आत्महत्या कर ली थी। मृत्यु पूर्व लिखे पत्र में उन्होंने प्रधानाचार्य सहित कुछ कार्मिकों पर प्रताड़ित करने के आरोप लगाये थे।

इस घटना से शिक्षा विभाग और प्रशासन में हड़कंप मच गया है। बाल विकास शिक्षक संगठन (सीडीईओ) के महेश गुप्ता ने उमरैण एवं सीमा गुप्ता की अध्यक्षता में तीन सदस्यों की समिति गठित की है जिसमें मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी सुनील कुमार और बख्तपुरा के प्रधानाचार्य भारत भूषण को शामिल किया गया है।

उन्होंने सोमवार को ढेहलावास स्कूल में जांच की। लिखित में पक्ष लिया। मंगलवार को जांच रिपोर्ट सीडीईओ को सौंपी जाएगी। इधर इस मामले की पुलिस जांच भारतीय पुलिस सेवा की अधिकारी शिवानी शर्मा को सौंप दी गई है।

शिक्षक भलाई पिछले 25 वर्षों से राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय ढेहलावास, पंचायत समिति उमरैण में अध्यापक पद पर कार्यरत थे। उनकी सरकारी सेवा करीब 38 वर्ष की होने वाली थी और 30 जून 2026 को उन्हें सेवानिवृत्त होना था। उनके परिवार में पत्नी, तीन बेटे, तीनों पुत्रवधू और पोतियां हैं, जो पूरी तरह उन पर आश्रित थे। मौके से चार पन्नों का मृत्यु पूर्व लिखा सोसाइड नोट बरामद हुआ था। जिसमें शिक्षक ने स्कूल के कुछ अध्यापकों और प्रधानाचार्य पर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के गंभीर आरोप लगाए हैं।

पत्र में शिक्षक ने लिखा था कि वह पिछले चार-पांच वर्षों से मानसिक, बौद्धिक और शारीरिक रूप से बेहद कमजोर स्थिति से गुजर रहे थे। बेटे की शादी से ठीक पहले उनका शरीर का आधा हिस्सा लकवाग्रस्त हो गया। आंखों की रोशनी कम हो गई और मानसिक संतुलन भी प्रभावित हुआ। इतनी गंभीर स्वास्थ्य स्थिति के बावजूद उनसे लगातार भारी प्रशासनिक और शैक्षणिक कार्य कराए जाते रहे। उनके पास निशुल्क पाठ्यपुस्तक वितरण, वर्क बुक, लाइब्रेरी, कक्षा एक से 12 तक का चार्ज और आठ विद्यालयों का अतिरिक्त कार्यभार था। बार-बार अनुरोध करने के बावजूद कोई भी शिक्षक उनका चार्ज लेने को तैयार नहीं हुआ। पत्र में उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि कुछ शिक्षक शराब के नशे में गाली-गलौज करते थे और धमकियां देते थे।

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