उदयपुर , जनवरी 02 -- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि शिक्षक को समाज में सम्मान की दृष्टि से देखा जाना चाहिए, क्योंकि इतिहास साक्षी है कि शिक्षकों ने कई बार सामाजिक परिवर्तनों की नींव रखी है।
श्री सिंह शुक्रवार को उदयपुर में भूपाल नोबल्स विद्या प्रचारिणी सभा के 104वें स्थापना दिवस समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल ज्ञान अर्जन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज, राष्ट्र और भविष्य की पीढ़ियों के निर्माण का सशक्त आधार है। शिक्षा वही सफल मानी जाती है जो धर्म को धारण कराये। यहां धर्म का अर्थ किसी संप्रदाय से नहीं, बल्कि उस दायित्वबोध और चेतना से है जो मानव चरित्र का निर्माण करती है।
श्री सिंह ने कहा कि शिक्षा केवल रोजगार प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि मानवीय मूल्यों, संवेदनाओं और आंतरिक गुणों और शक्तियों के विकास का साधन है। आस्था और विश्वास के बल पर जीवन की बड़ी से बड़ी समस्याओं का समाधान संभव है। मनुष्य केवल शब्दों से नहीं, बल्कि अपने कर्मों से विभूषित होता है। जीवन में सच्ची सफलता प्राप्त करने के लिए मन को अहंकार से मुक्त करना आवश्यक है। अहंकार रहित मन से ही अनंत सुख और परमानंद की प्राप्ति संभव है।
उन्होंने कहा कि नयी शिक्षा नीति-2020 भारत की सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत के साथ परंपरागत ज्ञान और आधुनिक शिक्षा का संतुलित समन्वय है। भारत का अतीत अत्यंत समृद्ध रहा है और हमारी परंपराएं और सांस्कृतिक धरोहर अपने आप में पूर्ण हैं। भारतीय ज्ञान परंपरा में निहित दृष्टिकोण जीवन में ऐसा संतुलन प्रदान करता है, जिससे ज्ञान केवल बौद्धिक ही नहीं, बल्कि जीवनोपयोगी भी बनता है।
श्री सिंह ने कहा कि स्थापना दिवस भविष्य को उत्कृष्ट बनाने की प्रतिबद्धता का प्रतीक होता है। उन्होंने संस्थान की विकास यात्रा, उसके संघर्षों और स्थापना के दौरान आए धैर्य और समय की परीक्षाओं का उल्लेख करते हुए जीवन के लक्ष्यों के प्रति समर्पण की आवश्यकता पर बल दिया। संस्थान विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य कर रहा है, जो आत्मनिर्भर भारत की यात्रा में एक महत्वपूर्ण योगदान है।
समारेाह से पूर्व रक्षा मंत्री ने संस्थान परिसर में लगी महाराणा भूपाल सिंह की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करके उन्हें नमन किया। इससे पहले श्री सिंह का कार्यकारिणी के सदस्यों द्वारा गुलाब कली देकर स्वागत किया गया उसके बाद एनसीसी कैडेट द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।
कार्यक्रम के आरंभ में कार्यकारी अध्यक्ष प्रो. एस.एस. सारंगदेवोत ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि वर्तमान में विश्व युद्ध कलाओं और कौशलों के एक संक्रमणकाल से गुजर रहा है। पारंपरिक युद्धों के स्थान पर अब युद्ध का स्वरूप हार्डवेयर से सॉफ्टवेयर की ओर तेजी से बदल रहा है, जहां साइबर सुरक्षा और कृत्रिम बुद्धमत्ता की भूमिका लगातार बढ़ती जा रही है। ऐसे समय में रक्षा मंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व के कारण भारत ने रक्षा क्षेत्र में ऐतिहासिक परिवर्तन किया है और अब युद्ध उपकरणों में आयातक से निर्यातक राष्ट्र के रूप में अपनी पहचान स्थापित की है।
संस्थान के प्रधान संरक्षक एवं अध्यक्ष महाराणा विश्वराज सिंह मेवाड़ ने संस्थान की स्थापना में महाराणा भूपाल सिंह के अमूल्य योगदान को विस्तार से रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि भूपाल सिंह ने अपने काल में पुस्तकों और ज्ञान के माध्यम से आधुनिक शिक्षा, नवाचार और व्यापक शैक्षिक सुधारों को बढ़ावा दिया।
समारोह में श्री सिंह ने संस्थान के विकास में योगदान देने के लिए 102 वर्षीय उदय सिंह पुरावत, तेज सिंह शक्तावत, रावत मनोहर सिंह कृष्णावत, गुणवंत सिंह झाला, प्रदीप सिंह सांगावत, कृष्ण सिंह सारंगदेवोत, चंद्रगुप्त सिंह चौहान, लाल सिंह झाला, को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड एवं खेलों में विशिष्ट उपलब्धियों के लिए कार्तिकी सिंह शक्तावत, अपूर्वी चंदेला को बीएन प्राइड अवॉर्ड से नवाजा गया।
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