वडोदरा , फरवरी 15 -- केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह गुजरात के वडोदरा में महाशिवरात्रि के अवसर पर श्री सर्वेश्वर महादेव की स्वर्णलेपित प्रतिमा के अनावरण व शिव परिवार की महाआरती में रविवार को शामिल हुए।

श्री शाह ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि जब कोई पुण्यात्मा सच्चे मन से संकल्प करता है, तो ईश्वर की कृपा से मुश्किल से मुश्किल संकल्प भी पूर्ण हो जाता है और बहुत बार तो वह एक परंपरा के रूप में परिवर्तित हो जाता है। इसका सबसे बड़ा और जीवंत उदाहरण सर्वेश्वर महादेव की यह विराट प्रतिमा है, जो आज शिवरात्रि के अवसर पर हम सबके समक्ष एक चमत्कार की तरह खड़ी है।

उन्होंने कहा कि सावली वाले महाराज ने तीन महान संकल्प किए थे। सुर सागर के मध्य में भव्य शिव प्रतिमा की स्थापना, शिवरात्रि के दिन वडोदरा में शिवजी की भव्य सवारी का आयोजन तथा गणेशजी की स्थापना। ये तीनों संकल्प हमारी आँखों के सामने साकार रूप में उपस्थित हैं। पूज्य सावली वाले स्वामी के इस महान संकल्प को सिद्ध करने में अनेक भक्तों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह संकल्प घर-परिवार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने पूरे वडोदरा शहर के नागरिकों को एक सूत्र में बाँध दिया।

श्री अमित शाह ने कहा कि आज शिवरात्रि का उल्लेख काशी, कोयंबटूर, रामेश्वरम या गिर सोमनाथ कहीं भी हो, देशभर में सुर सागर के सर्वेश्वर महादेव का नाम गूँजता है। यह विराट पुरुषार्थ, सामूहिक संकल्प और संतों के आशीर्वाद का ही परिणाम है, जिसने इस सरोवर को श्रद्धा का प्रमुख केंद्र बनाया है।

केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि आज देश में ऐसा कोई गाँव नहीं होगा जहाँ शिवरात्रि का उत्सव नहीं मनाया जा रहा हो। पिछले 11 वर्षों से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हमारे स्वाभिमान के बिंदुओं को फिर से गौरवपूर्ण स्थान दिलाने का संकल्प लिया है। उनके नेतृत्व में यह कार्य निरंतर आगे बढ़ रहा है। अयोध्या में कई दशकों तक राम लला एक साधारण टेंट में विराजमान रहे, लेकिन उनके नेतृत्व में उन्हें एक भव्य मंदिर में प्रतिष्ठापित किया गया।

श्री शाह ने कहा कि करोड़ों लोगों का संकल्प था कि अयोध्या में ठीक उसी स्थान पर, जहाँ प्रभु श्री राम का जन्म हुआ था, एक विराट मंदिर की स्थापना हो। बाबर के काल से लेकर आज तक यह संकल्प अधूरा रहा, लेकिन हम सभी सौभाग्यशाली हैं कि आज अयोध्या की उसी पावन भूमि पर प्रभु श्री राम की भव्य प्रतिमा स्थापित हो चुकी है। इसी प्रकार, काशी में औरंगजेब ने काशी विश्वनाथ मंदिर को छिन्न-भिन्न कर दिया था। आज मोदी जी के नेतृत्व में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर भी अपार भव्यता के साथ पुनर्निर्मित होकर खड़ा है।

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