सिलीगुड़ी , अप्रैल 14 -- केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के नेतृत्व पर कथित घुसपैठ एवं मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के मुद्दे पर हमला किया।
मानिकचक और मोथाबारी विधानसभा क्षेत्रों में मंगलवार को चुनावी रैलियों को संबोधित करते हुए अपने तीखे भाषण में श्री शाह ने मुख्यमंत्री बनर्जी पर मतदाता सूची को स्वच्छ करने के प्रयासों का विरोध करने का आरोप लगाया। उन्होंने आरोप लगाया, "जैसे ही चुनाव आयोग ने घुसपैठ मुक्त मतदाता सूची तैयार करने के लिए कदम उठाए, सुश्री बनर्जी घबरा गईं।" उन्होंने कहा कि एसआईआर अभ्यास का उद्देश्य अवैध घुसपैठियों की पहचान करना और उन्हें मतदाता सूची से हटाना है।
अपने हमले को तेज करते हुए श्री शाह ने घोषणा की कि अगर भारतीय जनता पार्टी सत्ता में आती है तो वह घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें देश से बाहर निकाल देगी। उन्होंने कहा, "पांच मई को सरकार बनने के बाद हम यह सुनिश्चित करेंगे कि घुसपैठियों की पहचान करके उन्हें वापस भेजा जाए। यह कार्रवाई केवल उत्तर बंगाल तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि पूरे देश में लागू की जाएगी।" उन्होंने लगभग 600 एकड़ भूमि का अधिग्रहण करके भारत-बंगलादेश सीमा पर बाड़ लगाने सहित सीमा सुरक्षा को मजबूत करने की योजनाओं की भी घोषणा की।
विकास पर ध्यान केंद्रित करते हुए, केंद्रीय गृह मंत्री ने उत्तर बंगाल के लिए कई परियोजनाओं का वादा किया, जिनमें चार औद्योगिक टाउनशिप के साथ-साथ एम्स, आईआईटी, एक कैंसर अस्पताल और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देने के लिए एक खेल विश्वविद्यालय जैसे संस्थान शामिल हैं।
राष्ट्रीय नीतिगत निर्णयों का हवाला देते हुए श्री शाह ने अनुच्छेद 370 को निरस्त करने और अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रशंसा की और कहा कि सरकार ने अपने वादे पूरे किए हैं।
श्री शाह ने तृणमूल कांग्रेस के पूर्व नेता हुमायूं कबीर को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा, "यह बात स्पष्ट रूप से समझ लेना चाहिए कि भारतीय धरती पर बाबरी मस्जिद के पुनर्निर्माण का कोई भी प्रयास बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसे इस देश में दोबारा नहीं बनाया जाएगा।"साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री बनर्जी को निशाना बनाते हुए कहा कि आपकी आकांक्षाएं पूरी नहीं होंगी और पांच मई को वे निर्णायक रूप से चकनाचूर हो जाएंगी।
उन्होंने तृणमूल कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए सिंडिकेट राज और व्यापक भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। बाढ़ राहत के लिए केंद्रीय निधियों से संबंधित खबरों का हवाला देते हुए श्री शाह ने सवाल उठाया कि क्या प्रभावितों के लिए आवंटित धन का गबन "कट-मनी" प्रथाओं के माध्यम से किया गया था।
चुनाव के दौरान कानून-व्यवस्था पर श्री शाह ने चेतावनी दी कि किसी भी प्रकार की हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बलों को तैनात किया जाएगा और अशांति फैलाने की कोशिश करने वालों से सख्ती से निपटा जाएगा। उन्होंने तृणमूल समर्थित तत्वों को मतदान के दिन किसी भी प्रकार की गड़बड़ी से दूर रहने की चेतावनी भी दी।
श्री शाह ने मालदा के प्रसिद्ध आम उद्योग को बढ़ावा देने में विफल रहने के लिए राज्य सरकार की आलोचना भी की और दावा किया कि गुजरात जैसे राज्यों में उच्च मांग के बावजूद, इसके विकास के लिए कोई सार्थक कदम नहीं उठाए गए हैं।
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