गांधीनगर , दिसंबर 05 -- केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को गुजरात के गांधीनगर स्थित महात्मा मंदिर में राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) और इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (आईएएमएआई) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय 'अर्थ समिट 2025-26' का शुभारंभ कर विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन भी किया।

श्री शाह ने अर्थ समिट एक्सपो के इस अवसर पर कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को देश की अर्थव्यवस्था में सबसे बड़ा योगदान देने वाला क्षेत्र बनाने के लिए 'अर्थ समिट' शृंखला के तीन संस्करणों का आयोजन किया जा रहा है। जिसका दूसरा संस्करण महात्मा गांधी की भूमि गुजरात में किया गया है। महात्मा गांधी जी ने आजादी से कहा था कि भारत के विकास की परिकल्पना उसके ग्रामीण क्षेत्रों को नजरअंदाज करके कभी नहीं की जा सकती। दुर्भाग्यवश ग्रामीण विकास के तीन महत्वपूर्ण अंगों कृषि, पशुपालन और सहकारिता क्षेत्र की आजादी के बाद कई वर्षों तक उपेक्षा की गई।

केंद्रीय सहकारिता मंत्री ने कहा कि वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री के रूप में कार्यभार संभालने के बाद श्री नरेन्द्र मोदी ने एक बार फिर महात्मा गांधी के मंत्र को पुनर्जीवित करने के लिए इन तीनों क्षेत्रों के विकास पर बल देकर देश में नए परिवर्तन की शुरुआत की। देश की 80 फीसदी आबादी का भविष्य निर्धारित करने वाले ग्रामीण विकास, कृषि और सहकारिता मंत्रालय को और सुदृढ़ एवं परिणाम- उन्मुख बनाने के लिए उन्होंने इन तीनों मंत्रालयों के संयुक्त बजट में वर्ष 2014 से अब तक तीन गुनी वृद्धि की है। 2014 में इन तीनों मंत्रालय का संयुक्त बजट 1.02 लाख करोड़ रुपए था, जो 2025-26 में 3.15 लाख करोड़ रुपए से अधिक हो गया है।

श्री शाह ने कहा कि हर देशवासी का यह संकल्प है कि जब देश की आजादी के 100 वर्ष पूरे हों, तब भारत हर क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अव्वल हो। इस पूर्ण विकसित भारत की कल्पना देश के प्रत्येक नागरिक के कल्याण के बिना संभव नहीं है। भारत सरकार ने नागरिकों की खुशहाली और सहकारी क्षेत्र के विकास के लिए आने वाले समय में देश की हर पंचायत में एक सहकारी संस्था और पूरे देश में 50 करोड़ से अधिक सक्रिय सहकारी सदस्य बनाकर देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में सहकारी क्षेत्र के योगदान को तीन गुना बढ़ाने का आयोजन किया है।

उन्होंने अर्थ समिट के विषय 'वैश्विक परिवर्तन के लिए ग्रामीण नवाचार को सशक्त बनाना' का उल्लेख करते हुए कहा कि छोटे-छोटे बदलावों और नवाचारों से ग्रामीण क्षेत्र का देश की अर्थव्यवस्था में योगदान तथा नागरिकों की सुविधाएं किस प्रकार बढ़ सकती हैं, इस दिशा में चिंता, चिंतन और परिणाम- उन्मुख चर्चाएं करना ही इस अर्थ समिट का मुख्य लक्ष्य है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस समिट के अमृत चिंतन से देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की अनेक बड़ी चुनौतियों का समाधान लाया जा सकता है।

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