हमीरपुर , जनवरी 06 -- हिमाचल प्रदेश में हमीरपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद और पूर्व मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा है कि संसद से पारित "शांति विधेयक 2025" 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा उत्पादन के महत्वाकांक्षी लक्ष्य की प्राप्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
श्री ठाकुर ने मंगलवार को कहा कि वर्ष 2025 को भारत के ऊर्जा इतिहास में एक महत्वपूर्ण वर्ष के रूप में दर्ज किया जाएगा जहां देश ने न केवल अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत किया बल्कि भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने की नींव भी रखी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत के परिवर्तन के लिए परमाणु ऊर्जा का सतत दोहन एवं विकास (शांति) विधेयक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। वर्ष 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा उत्पादन का महत्वाकांक्षी लक्ष्य "शांति" विधेयक के माध्यम से प्राप्त किया जाएगा।
भाजपा सांसद ने कहा, "मोदी सरकार ने 1962 के परमाणु ऊर्जा अधिनियम को आज की तकनीक एवं आवश्यकताओं के अनुरूप आधुनिक बनाने के लिए शांति विधेयक पेश किया क्योंकि मौजूदा प्रणाली में एक समान सुरक्षा नियमों का अभाव था और नियामक निकायों की शक्तियां सीमित थीं।"श्री ठाकुर ने कहा, "शांति विधेयक 2025 निजी क्षेत्र की भागीदारी का मार्ग प्रशस्त करता है जिससे भारतीय एवं विदेशी कंपनियां नए परमाणु ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना में सहयोग कर सकेंगी और 2047 तक 100 गीगावाट का लक्ष्य प्राप्त कर सकेंगी। यह पहल भारत को स्वच्छ, सुरक्षित एवं सस्ती परमाणु ऊर्जा के एक नए युग में प्रवेश कराएगी। यह पहल केवल एक कानून नहीं बल्कि ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने, उच्च स्तरीय सुरक्षा मानकों को सुनिश्चित करने, युवाओं के लिए नए अवसर सृजित करने और विकसित भारत के लिए एक उज्ज्वल भविष्य का निर्माण करने की आधारशिला है।"उन्होंने कहा, "'शांति' विधेयक भारत के परमाणु ऊर्जा कानूनों में व्यापक सुधार लाने एवं स्वतंत्रता के बाद पहली बार परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के निर्माण एवं संचालन में निजी क्षेत्र की भागीदारी को सक्षम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।"उन्होंने आगे कहा कि भारत में बदलाव के लिए सतत परमाणु ऊर्जा दोहन एवं विकास (शांति) विधेयक, 2025, भारत की परमाणु ऊर्जा यात्रा को अगले चरण में पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। कानूनी संरचना का आधुनिकीकरण एवं संस्थागत निगरानी को मजबूत करके यह ज्यादा कुशल, अभिनव एवं सुरक्षित परमाणु ऊर्जा पारिस्थितिकी तंत्र की नींव रखेगा।
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