रांची , जनवरी 08 -- झारखंड की कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने मांडर के फॉरेस्ट मैदान में सन् 1857 की क्रांति के महानायक शहीद शेख भिखारी और शहीद टिकैत उमराव सिंह की शहादत दिवस पर कार्यक्रम में दोनों महानायकों की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर नमन किया।

इस अवसर पर सुश्री तिर्की ने कहा कि मौजूदा दौर में दोनों महानायकों की शहादत को समझने और इससे सीख लेने की जरूरत है। हिंदू और मुस्लिम दोनों के साझा प्रयास से ही भारत देश अंग्रेजों की गुलामी से आजाद हो पाया था। उन्होंने कहा कि अगर स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई में हिंदू राष्ट्र या मुस्लिम राष्ट्र की सोच होती, तो ये संभावन नहीं हो पाता। उस वक्त सिर्फ मन में देश की आजादी का जुनून था। आज समाज के अंदर अंग्रेजों की सोच की तरह ही फूट डालो और राज करो की राजनीति हो रही है। इस षडयंत्र को नाकाम करना होगा।

सुश्री तिर्की ने कहा कि नाम बदलने की राजनीति से देश और राज्य खोखला हो रहा है। ग्रामीण अर्थ व्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले मनरेगा को आज खत्म किया जा रहा है। ऐसा होने से रोजगार के नाम पर गांव के लोग फिर एक बार पलायन को मजबूर होंगे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने पेसा नियमावली को लागू कर पारंपरिक व्यवस्था को मजबूती प्रदान करने का काम किया है। पारंपरिक ग्राम सभा के माध्यम से जमीन अधिग्रहण से लेकर वनोपज के मुद्दों का निबटारा हो पाएगा। लेकिन कुछ लोग पेसा नियमावली को समाज के बीच गलत तरीके से परोसने में लगे है। समाज को बांटने वाले लोग तबतक कामयाब नहीं होंगे जबतक हम सभी लोग एकजुट रहेंगे।

शहादत दिवस कार्यक्रम में ग्रामीणों के बीच कंबल का वितरण किया गया। इस कार्यक्रम में बीडीओ चंचला कुमारी, प्रखंड अध्यक्ष मंगा उरांव, प्रखंड अध्यक्ष इस्तियाक, शमीम अख्तर, मुजीबुल्ला, सरिता तिग्गा, नसीम अंसारी, नसीमा खातून, होसे उरांव, सुका उरांव, जमील मल्लिक, रशीद, संजय, जोएल तिग्गा, मेरी एक्का, अर्जुन महतो, बंधु टोप्पो, आजाद अंसारी, मंगलेश्वर उरांव सहित अन्य मुख्य रूप से उपस्थित थे।

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