अनंतनाग/ अमृतसर , नवंबर 15 -- नौवें गुरु तेग बहादुर के शहीदी दिवस की 350वीं वार्षिक समारोह को समर्पित दूसरा ऐतिहासिक नगर कीर्तन शनिवार को शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी द्वारा प्रथम गुरु नानक देव के पावन स्थल गुरुद्वारा मटन साहिब (कश्मीर) से खालसा ध्वज के साथ आरंभ किया गया।

यह 'पुकार दिवस' नगर कीर्तन पंडित किरपा राम जी द्वारा कश्मीरी पंडितों के साथ श्री आनंदपुर साहिब आकर श्री गुरु तेग बहादुर जी को धर्म की रक्षा के लिए किए गए आह्वान की स्मृति में आयोजित किया गया है। इससे पहले, गुरुद्वारा धोबडी साहिब, असम से भी एक नगर कीर्तन का आयोजन किया जा चुका है।

गुरुद्वारा मटन साहिब से नगर कीर्तन के प्रस्थान के अवसर पर एसजीपीसी अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी, तख्त श्री केशगढ़ साहिब के जत्थेदार और श्री अकाल तख्त साहिब के कार्यवाहक जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज, तख्त श्री दमदमा साहिब के जत्थेदार ज्ञानी टेक सिंह और सचखंड श्री हरमंदिर साहिब के ग्रंथी ज्ञानी परविंदरपाल सिंह, अंतरिम सदस्य गुरप्रीत सिंह झब्बर, बीबी हरजिंदर कौर और सदस्य भाई राजिंदर सिंह मेहता सहित प्रमुख हस्तियों ने भाग लिया।

आरंभ से पहले, श्री अखंड पाठ साहिब के भोग डाले गये, जिसके बाद हजूरी रागी जत्थे ने गुरबाणी कीर्तन किया। महंत मनजीत सिंह ने अरदास की और सचखंड श्री हरमंदिर साहिब के ग्रंथी सिंह साहिब ज्ञानी परविंदरपाल सिंह ने पवित्र हुक्मनामा लिया।

इस अवसर पर बोलते हुए, एसजीपीसी अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने कहा कि सिख धर्म की विशिष्टता यह है कि इसमें गुरुओं के साथ-साथ इतिहास के योग्य सिख सेवकों को भी याद किया जाता है। उन्होंने कहा कि पंडित किरपा राम जी कश्मीरी पंडितों की शिकायत लेकर गुरु तेग बहादुर के पास गये थे और गुरु जी ने धर्म की रक्षा और धार्मिक स्वतंत्रता के लिए अपनी शहादत दी थी।

उन्होंने कहा कि गुरु जी ने दूसरों के धर्म की रक्षा के लिए शहादत देकर आपसी भाईचारे का जो संदेश दिया, उसे और मज़बूत करना हमारा कर्तव्य है। गुरुद्वारा मटन साहिब से जुड़े मुद्दे पर एडवोकेट धामी ने सभी पक्षों से मिल-बैठकर इसे सुलझाने की अपील की। शताब्दी समारोह का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि गुरु साहिब की शहादत के संकल्प का संदेश घर-घर पहुंचाने के लिए नगर कीर्तन का आयोजन किया गया है और श्रद्धालुओं का उत्साह इसकी सफलता को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि सभी धर्मों के लोग इसमें शामिल होकर गुरु साहिब को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से 23 से 29 नवंबर तक श्री आनंदपुर साहिब में आयोजित होने वाले शताब्दी समारोह में शामिल होने की अपील भी की।

इस दौरान, श्री अकाल तख्त साहिब के कार्यकारी जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने कहा कि पंडित किरपा राम इतिहास के वह पात्र हैं, जिन्होंने औरंगजेब द्वारा जबरन जनेऊ उतार दिये जाने के बाद गुरु तेग बहादुर का साथ मांगा था। उन्होंने कहा कि आज जब गुरु साहिब जी की 350वीं शहादत मनायी जा रही है, तो गुरु घर के प्रति श्रद्धा रखने वाले पंडित किरपा राम जी को भी याद किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक स्थान से नगर कीर्तन शुरू करने की शिरोमणि कमेटी की पहल सराहनीय है, जो संगत को इतिहास से जोड़ने में मदद करेगी। उन्होंने लोगों को आपसी भाईचारे को मजबूत करने के लिए एकजुट होने के लिए भी प्रोत्साहित किया।

मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष अशोक कुमार ने कहा कि मटन के हिंदुओं और सिखों के बीच सांप्रदायिक बंधन हैं और वे हमेशा एक-दूसरे के साथ सहयोग के लिए प्रयासरत रहेंगे।

इस अवसर पर पंज प्यारे साहिबानों, निशानची सिंहों और प्रमुख हस्तियों को भी सम्मानित किया गया। मटन साहिब से जम्मू तक के रास्ते में संगत ने नगर कीर्तन का स्वागत किया और गुरु साहिब को श्रद्धांजलि अर्पित की। रास्ते में रामबन में हिंदू समुदाय ने संगत के लिए लंगर की व्यवस्था की।

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