जयपुर , जनवरी 23 -- राजस्थान में शनिवार को राजस्थान उच्च न्यायालय में कामकाज लागू करने के फैसले के खिलाफ राज्यभर के वकीलों ने स्वैच्छिक कार्य बहिष्कार का ऐलान किया है।

नई न्यायिक व्यवस्था के अनुसार अब शनिवार को भी उच्च न्यायालय खुलेगा और न्यायाधीश नियमित रूप से बैठेंगे, लेकिन अधिवक्ता अदालत में पेश नहीं होंगे।

राज्य बार परिषद और विभिन्न अधिवक्ता संघों ने इस निर्णय को वकीलों के हितों और व्यावहारिक परिस्थितियों के प्रतिकूल बताते हुए विरोध दर्ज कराया है। वकीलों का कहना है कि शनिवार को अदालतें खोलने से न्यायिक व्यवस्था में सुधार के बजाय अधिवक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ बढ़ेगा, जबकि पहले से ही मुकदमों का दबाव अत्यधिक है। इसके अलावा, कई अन्य न्यायिक और प्रशासनिक व्यवस्थाओं में शनिवार अवकाश का दिन माना जाता है, जिससे समन्वय में भी कठिनाइयां उत्पन्न होंगी।

अधिवक्ता संगठनों का तर्क है कि शनिवार को न्यायालय खोलने से न तो लंबित मामलों के निस्तारण में विशेष बढ़ोत्तरी होगी और न ही न्यायिक दक्षता पर कोई सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। उनका कहना है कि मौजूदा संरचना में अतिरिक्त कामकाज से संसाधनों पर भार बढ़ेगा और न्याय व्यवस्था की गुणवत्ता पर असर पड़ेगा। वकीलों ने यह भी कहा कि किसी प्रकार का सुधार करना है, तो पहले मौजूदा दिनों में सुनवाई की क्षमता को बढ़ाया जाए, पीठों की संख्या बढ़ाई जाए और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में तेजी लाई जाए।

शनिवार के कार्यदिवस के विरोध में वकीलों ने स्पष्ट किया है कि उनका यह बहिष्कार पूरी तरह स्वैच्छिक और शांतिपूर्ण है। वे न्यायपालिका का सम्मान करते हैं, लेकिन इस नीति को व्यावहारिक और न्यायसंगत नहीं मानते। इसलिए जब तक इस फैसले पर पुनर्विचार नहीं किया जाता, वकील शनिवार को अदालतों में पेश नहीं होंगे।

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